सैंज - कुल्लू घाटी के शांघड़ गांव में सोमवार देर रात पेश आए प्रचंड अग्निकांड में देव शंगचूल महादेव का काष्ठकुणी शैली में बना भव्य चार मंजिला देवालय जलकर नष्ट हो गया। संयोग ऐसा रहा कि हाल ही में देवालय बनकर तैयार हुआ था और इसकी प्रतिष्ठा की हारियान तैयारियां कर रहे थे। मंदिर के साथ लगते तीन मकान भी आग की भेंट चढ़ गए हैं। देवलू अपने प्राण दांव पर लगाकर अधिष्ठाता देव के रथ को आग की लपटों से बाहर निकालने में कामयाब हो गए, लेकिन देवता शंगचूल के सदियों पुराने 18 मोहरों के अलावा सोने का एक तथा चांदी के चार छतर नहीं बचाए जा सके।
अग्निकांड में लाखों रुपए की संपत्ति स्वाह हो गई। दावानल से 18 परिवार बेघर हो गए हैं। घटना में किसी के शख्स के हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने के कारणों का स्पष्ट तौर पर पता नहीं चल सका है। आशंका जाहिर की जा रही है कि रात को अंधड़ चलने से बिगड़े मौसम के दौरान बिजली का शार्ट सर्किट होना ही भीषण दावानल का कारण बना है। इस वाकय ने देव समाज को भीतर तक झकझोर कर रख दिया है। बंजार के उपमंडलाधिकारी (नागरिक) अश्विनी कुमार ने घटनास्थल का स्वयं दौरा करते हुए स्थिति का जायजा लिया है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को दस-दस हजार रुपए की राशि फौरी राहत के तौर पर दी गई है तथा कंबल भी वितरित किए गए हैं।
स्थानीय विधायक कर्ण सिंह, पूर्व मंत्री पंडित खीमी राम शर्मा तथा पूर्व मंत्री सत्य प्रकाश ठाकुर ने घटना पर गहरा दुख प्रकट किया है। राहत की बात यह रही कि देवलुओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर देवता के रथ को बचा लिया। बहरहाल,अग्निकांड से गांव में शोक की लहर है।