चण्डीगढ़ - हरियाणा सरकार ने सभी उपायुक्तों को अप्रैल मास के शुरूआती दिनों में हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि के कारण नष्ट हुई फसलों का पुन: मूल्यांकन के लिए 15 अप्रैल तक विशेष गिरदावरी का कार्य पूरा करके 16 अप्रैल तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मार्च के अतं तक उपायुक्तों द्वारा पहले से भेजे गई फसल नुकसान के आकलन के सम्बन्ध में भी उन्हें इस समय हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि से हुए फसलों के नुकसान का पुन: आकलन करने के लिए भी कहा है और इसकी रिपोर्ट 16 अप्रैल तक भेजना सुनिश्चित करें। प्रवक्ता ने बताया कि विशेष गिरदावरी की रिपोर्ट आने के बाद 30 दिनों के भीतर राज्य सरकार प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरित करना सुनिश्चित करेगी।
प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में वर्तमान हरियाणा सरकार ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए जिला हिसार में खरीफ 2013 अर्थात जुलाई से सितम्बर में कीड़ा का हमला से नष्ट हुई फसलों के मुआवजे के लिए 18.40 करोड़ रुपये और जिला भिवानी, हिसार और जींद में खरीफ 2014 अर्थात जून से सितम्बर में सूखे से फसलों को हुए नुकसान के लिए लगभग 123 करोड़ रुपये के मुआवजे को स्वीकृति प्रदान की है और इस समय इन जिलों में ये मुआवजा वितरित किया जा रहा है, जबकि पिछली सरकार ने इस मुआवजे को स्वीकृति तक प्रदान नहीं की थी। अब कुछ राजनैतिक लोगों द्वारा अपनी राजनैतिक रोट्टिïयां सेंकने के लिए किसानों में कम मुआवजा देने सम्बन्धी भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। वर्तमान सरकार ने पिछली सरकार के लम्बित पड़े मुआवजे को स्वीकृत करके बांटने का कार्य किया है, जबकि पिछली सरकार ने तो किसानों के मुआवजे को स्वीकृति तक नहीं दी थी ।
प्रवक्ता ने जोर देकर स्पष्ट किया कि वर्तमान में इन जिलों में बांटा जा रहा मुआवजा खरीफ 2014 में आई आपदा के समय तत्कालीन सरकार के मापदण्डों के हिसाब से है। प्रवक्ता ने कहा कि रबी 2015 अर्थात फरवरी 2015 से अब तक हुई भारी वर्षा और ओलावृष्टि का मुआवजा वर्तमान सरकार द्वारा अनुमोदित मापदण्डों के अनुसार होगा, जिनमें न्यूनतम 500 रुपये मुआवजा का प्रावधान शामिल है।