नूंह - देशभर में बहुत सारी सुर्खियां बटोर चुके घर वापसी के मामले से अब मेवात का नाम भी जुड़ गया है। हालांकि इस घर वापसी में न तो आरएसएस की कोई भूमिका है और न ही अन्य किसी धार्मिक संगठन की। मौजूदा मामले में कलयुगी मां-बाप की लालच का शिकार हुई पीडि़ता ने स्वयं ही यह कदम उठाया है। फिलहाल पीडि़ता अपने रिश्तेदारों के पास रह रही है और पुलिस ने पीडि़ता के बयान पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
उक्त मामले में जानकारी के मुताबिक नूंह निवासी हरिजन जाति से संबंध रखने वाली एक नाबालिग लडक़ी ने आरोप लगाया है कि करीब 3 साल पहले उसकी शादी उसकी मर्जी के खिलाफ तावडू में कर दी गई। तावडू में उसका पति उससे मारपीट करता तो तंग आकर वह अपने मां-बाप के घर आ गई। आरोप है कि यहां करीब 5 माह रहने के बाद पीडि़ता की सौतेली मां ने उसके पिता के साथ मिलकर 10 हजार रुपए में रेवासन निवासी ताहिर पुत्र हजरखां को बेच दिया।
पीडि़ता के बयान के मुताबिक यहां से उसके जीवन नरकीय ने नरकीय मोड़ ले लिया। पीडि़ता ने आरोप लगाया है कि उसका नाम बदलकर ताहिर की पहली पत्नी वरीसा के नाम पर रख दिया गया। साथ ही वरीसा के नाम पर ही उसका आधार कार्ड बनवाया गया, जिसमें उसका जन्म 1979 में दिखाया गया है, जबकि उसकी उम्र करीब 15 साल बताई जा रही है। पीडि़ता ने आरोप लगाया कि ताहिर और उसके परिजन उसे नमाज पढने के लिए मजबूर करते थे, नमाज न पढने की सूरत में उसे खूब पीटा जाता था।