कुरुक्षेत्र - बीती रात मुठभेड़ में पुलिस ने एक बदमाश को ढेर कर दिया। इसमें एक एएसआई कुलदीप सिंह की जान भी चली गयी। मुठभेड़ के दौरान मारे गये बदमाश के कुछ साथी फरार हो गये। पुलिस महकमे ने मारे गये एएसआई के परिजनों को अन्य विभागीय भुगतानों के अलावा 10 लाख रुपए देने का निर्णय किया है। बदमाश की पहचान नहीं हो पाई है। हालांकि उसे करनाल क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर बताया जा रहा है।
वारदात के बारे में कुरुक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक सिमरदीप सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार रात करीब 11.30 बजे उनके पास अम्बाला पुलिस से सूचना आई थी कि दो बदमाश जीटी रोड स्थित हवेली रेस्टोरेंट के पास से कार छीन कर ले गए हैं। उन्होंने बताया कि पहले शाहाबाद के पास बदमाशों को पकडऩे की कोशिश की गई, लेकिन बदमाश वहां से पुलिस पर गोलियां बरसाते हुए कार भगा ले गये। पिपली के पास पुलिस द्वारा लगाए गए नाके पर बदमाश पुलिस से घिर गए।
पुलिस से घिरते ही बदमाश कार छोडक़र चिडय़िाघर के पीछे बने गोदामों की आड़ लेकर भाग गये। पुलिस उनका पीछा करती रही। पिपली-लाडवा रोड पर थाने के करीब एक बदमाश को पुलिस ने देख लिया और जैसे ही सीआईए-2 में एएसआई के पद पर कार्यरत कुलदीप सिंह ने बदमाश को पकडऩे की कोशिश की तो बदमाश ने खोके के पीछे से एएसआई कुलदीप सिंह पर देसी पिस्तौल से गोलियां दाग दीं। इनमें से एक गोली कुलदीप की छाती पर लगी लेकिन कुलदीप बदमाश से भिड़ता रहा। बदमाश ने लगातार गोलियां दागीं। इसी बीच बदमाश को दबोचने के लिए कुलदीप के साथ की पुलिस ने भी गोलियां चलाई ।
जिला करनाल के गांव रामगढ़ गामड़ी आमुपुर के रहने वाले शहीद एएसआई कुलदीप सिंह को पुलिस प्रशासन की तरफ से 105 बार प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। 4 अप्रैल 2008 को एक युवक को यूपी से अपहर्ताओं के हाथ से बचाकर लाने में उन्हें पदोन्नति भी मिली थी। पुलिस अधीक्षक सिमरदीप सिंह ने खुद माना कि एएसआई कुलदीप सिंह के जाने से उनका एक महत्वपूर्ण कर्मचारी चला गया है। कुलदीप अपने पीछे पत्नी सुनीता (28 वर्ष), बेटे उदय सिंह व छोटे बेटे संदीप को छोड़ गए हैं।
उनकी वृद्ध मां शांति भी उनके सहारे पर थी। 10 जून 1970 को जन्में शहीद एएसआई कुलदीप सिंह एक अक्टूबर 1989 को पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। कुलदीप सिंह का अंतिम संस्कार शनिवार को उनके गांव में किया जाएगा। उन्हें पुलिस द्वारा सलामी भी दी जाएगी।