चंडीगढ़, 6 फरवरी- (अभीतक न्यूज़) बलात्कार के मामलों की तहत भ्रष्टाचार के मामलों की सुनावाइ भी फास्ट ट्रैक कोर्ट में ही होनी चाहिए जिससे दोषी लोगों पर उचित निर्णय हो सके। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला व उनके बेटे अजय चौटाला को कुल 17 साल की सजा हुई है। इसमें 10 साल की जालसाजी तथा 7 साल भ्रष्टाचार के लिए सुनाई गई है, जोकि साथ-साथ चलेगी। अदालत के इस फैसले से कुछ भी गलत करते समय प्रत्येक राजनेता के दिमाग में भय होगा और उनकी हालत भी चौटाला व अन्य सहयोगियों जैसी ही होगी। इस निर्णय से भारतीय राजनीति तथा लोकतांत्रिक प्रणाली में लोगों का विश्वास बढ़ेगा।
प्रो. सम्पत सिंह ने अभय चौटाला के उस ब्यान की कड़ी निंदा की जिसमें उन्होने चौ. देवी लाल के जेल जाने की बात कही थी। चौ. देवी लाल हमेशा जनता के हितों की रक्षा के लिए जेल गये है, जिनकी ओमप्रकाश चौटाला के जेल जाने से तुलना नही की जा सकती। चौ. देवी लाल ने कभी जनता के साथ धोखाधड़ी, जालसाजी तथा भ्रष्टाचार नही किया। इसलिए इनेलो नेताओं को चौ. देवीलाल का नाम लेकर उनका अपमान नही करना चाहिए।
इस मामले में दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि श्री चौटाला के वकील एस के सक्सेना ने जज के समक्ष श्री चौटाला और उनके पुत्र को कम सजा देने का आग्रह करते हुए कहा था कि ‘वैसे भी यह सजा दोनों के लिए पर्याप्त सजा है क्योंकि समाज में उनके लिए मुंह दिखाना मुश्किल हो गया है।’
केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने संज्ञान से मामला दर्ज नहीं किया और न ही मामला किसी कांग्रेस समर्थक की शिकायत पर भी दर्ज किया गया। जबकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जांच के आदेशों के फलस्वरूप दर्ज हुआ था। उस समय जब सीबीआई ने प्रारंभिक जांच आरंभ की थी तो केन्द्र में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार थी और इस गठबंधन में इनेलो भी एक सहयोगी था।
एक प्रश्न के उत्तर में प्रो सम्पत सिंह ने कहा कि विवादित 3206 जेबीटी अध्यापकों को सेवा में आये 10 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है और अगर कोई कानूनी अड़चन नहीं है तो सरकार को उनकी सेवाएं बनाये रखनी चाहिए।