पंचकूला - पंजाबी साहित्य अकादमी द्वारा आज अम्बाला के सार्इं दास जैन कालेज में एक चर्चा, परिचचा और कवि दरबार का आयोजन किया गया। जिसमें लगभग एक दर्जन हरियाणा के प्रमुख कवियों ने हिस्सा लिया। चर्चा-परिचर्चा का विषय था- मैं कविता कैसे और क्यों लिखता हूं। कवियों ने मंच पर आकर इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। हर कवि का विचार था कि उसके ज़ेहन में कविता तभी जन्म लेती है जब उसकी सोच आपने-आप अंबरों में उडान भरने लगती है।
अम्बाला की कारपोरेशन कमिशनर और भूतपूर्व एस. डी. एम. कमलप्रीत कौर ने अपनी कविता पढऩे से पहले बताया कि उसने कविता के बारे में बहुत नहीं पढ़ा फिर भी उनके भीतर से कभी-कभी सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए एक हलचल होने लगती है तो मैं अपनी कलम द्वारा उसको कविता का रूप दे देती हूं। यमुनानगर के डा. रामेश कुमार ने कहा कि कविता एक करतारी रंग है। मन की गहराईयों में कई बार सोचों का बवंडर उठता है और ये सोचें कवि की कलम के साथ-साथ शब्दों का रूप धारण कर लेती हैं।
कुछ कविताओं में आज की नारी के उत्पीडऩ का जिक्र भी किया और साथ ही भ्रूण हत्या के दुख को भी व्यक्त किया गया।