चंडीगढ़ - मानसून की बेरुखी के कारण अभी तक पूरे देश में ही कम वर्षा हुई है। लेकिन हरियाणा सरकार ने कम वर्षा को अपना चुनावी हथकंडा बना लिया है। राज्य में करीब 65 फीसदी तक बरसात कम हुई है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने स्पेशल गिरदावरी के आदेश दिए हैं। राज्य की ओर से केंद्र से सूखा राहत के लिए 4829.75 करोड़ रुपए के पैकेज की मांग बीते शनिवार को ही की जा चुकी है।
इस बारे में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया कि वर्ष 2002 में भी सूखा घोषित किया गया था। तब प्रदेशभर में 50 फीसदी से कम बारिश हुई थी। इस बार 18 जिलों में 50 फीसदी तक बरसात कम हुई है जबकि बाकी तीन जिलों में 65 फीसदी तक कम। लेकिन पूरे प्रदेश को ही सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
2002 में केंद्र सरकार से 1200 करोड़ का पैकेज मांगा था लेकिन मिले थे 400 करोड़। सरकार ने कहा है कि फसल 50 प्रतिशत से कम खराब हुई तो मुआवजा नहीं मिलेगा। ज्यादा नुकसान पर आकलन के बाद गेहूं व धान की फसल के लिए 4000 और अन्य फसलों के लिए 3500 रु. प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि सीआरएफ नियमों में इन फसलों के लिए 3600 और 1800 रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है।