शिमला - केंद्र सरकार द्वारा कोल ब्लॉक आबंटन मामले में चल रहे विवाद के नतीजतन हिमाचल की मुश्किलें भी बढ़ती दिख रही हैं। हालांकि प्रदेश का कोल ब्लॉक पहले ही रद्द कर दिया गया है, मगर इस पर सुप्रीम कोर्ट में स्टे लगा हुआ है। अब जिस तरह से कोल आबंटन में नया विवाद खड़ा हुआ है और सुप्रीम कोर्ट उसमें फैसला देने वाला है तो प्रदेश की नजरें भी उस पर टिक गई हैं। हिमाचल की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले को लेकर माना जा रहा है कि प्रदेश के हक में यह फैसला आएगा, मगर प्रदेश के अधिकारी नए विवाद के बाद कुछ संशय में चल रहे हैं।
पूर्व केंद्र सरकार के समय में ही हिमाचल को वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल में कोल ब्लॉक का आबंटन हुआ था और जिंदल विवाद के चलते प्रदेश का आबंटन भी रद्द किया गया, जिस पर सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है। यहां बता दें कि प्रदेश को पश्चिम बंगाल के गुरंदी में 30 मिलीयन मीट्रिक टन क्षमता का कोल ब्लॉक आबंटित हुआ था, जिसमें एम्टा कोल लिमिटेड कंपनी भागीदार है। हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन और एम्टा ने मिलकर हिमाचल एम्टा पावर लिमिटेड कंपनी का निर्माण किया है जो रानीगंज में 500 मेगावाट की थर्मल बिजली परियोजना का निर्माण करेगी। प्रदेश के लिए पहली दफा थर्मल पावर उत्पादित होनी थी, जिसे बिजली बोर्ड ने खरीदना था। इससे हाइड्रो पावर पर निर्भरता को कम किया जा सकता है, मगर जब तक कोल ब्लॉक नहीं होगा, तब तक थर्मल पावर कैसे तैयार की जाएगी। इसके चलते मामला पूरी तरह से लटक गया है।