शिलाई - राष्ट्रीय उच्च मार्ग एनएच-72बी टौंस नदी पर प्रस्तावित किसाउ बांध की जद में आ रहा है। जामली से वाया मिनस जिस मार्ग पर सोलिंग का कार्य चल रहा है वह भी पानी में डूब जाएगा। सडक़ का तीन किलोमीटर भाग जलमग्न होगा और तीन किलोमीटर मार्ग खतरे के निशान के अंतर्गत आएगा। इस हालत में भी राष्ट्रीय उच्च मार्ग एनएच-72बी वाया मिनस होकर बनाया जा रहा है। हालांकि विभाग के पास वाया रोहनाट विकल्प है, लेकिन शायद विभाग को यह जानकारी नहीं है कि वाया मिनस मार्ग बनाने से विभाग के करोड़ों रुपए पानी में डूब जाएंगे।
7193 करोड़ की लागत से बनने वाली 660 मेगावाट की प्रस्तावित बहु-उद्देश्यीय किसाउ बांघ परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है। हिमाचल व उत्तराखंड के बीच एमओयू हस्ताक्षरित होना बाकी है। राष्ट्रीय उच्च मार्ग एनएच-72बी पर इन दिनों 22 करोड़ की लागत से प्रथम फेज की सोलिंग का कार्य चल रहा है, विभाग के पास विकल्प भी है कि यदि विभाग मार्ग वाया रोनहाट बनता है तो उसे दो लाभ होते हैं। पहला यह है कि क्षेत्र की 20 पंचायतें एनएच-72बी से जुड़ जाती हैं दूसरा यह कि लगभग छह किलोमीटर पर खर्च होने वाली करोड़ों की राशि भी डूबने से बच जाएगी।
उधर, इस संबंध में यूजेवीएन देहरादून के परियोजना महाप्रबंधक अजय पटेल ने बताया कि बांध की डीपीआर व अन्य सभी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा एमओयू साइन होना बाकी है। उन्होंने कहा कि मिनस डूब क्षेत्र में आता है। कितनी सडक़ डूबेगी यह मौके पर भौतिक निरीक्षण के बाद ही पता चलेगा। उधर, राष्ट्रीय उच्च मार्ग मंडल सोलन के अधिशाषी अभियंता एम सिंघल ने बताया कि एनएच-72बी वाया मिनस बन रहा है। उनके पास कोई भी ऐसा प्रमाण नहीं है कि मिनस बांध के डूब क्षेत्र में आ रहा है। बांध के बारे उन्हें ज्ञात नहीं है और न उन्हें बांध बनाने वाले विभाग ने इस बारे में कोई सूचना दी है।