शिमला - आर्थिक दिक्कतों से जूझ रहे हिमाचल की 4400 करोड़ की योजना का निर्धारण अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई संस्था करेगी। हालांकि प्रदेश की योजना को हिमाचल प्रदेश विधानसभा पारित कर चुकी है। इसी महीने योजना आयोग से इस संदर्भ में बैठक निर्धारित थी, मगर प्रधानमंत्री द्वारा योजना आयोग को खत्म करने के ऐलान के बाद अब न केवल हिमाचल, बल्कि विशेष श्रेणी दर्जा हासिल सभी पूर्वोत्तर राज्यों की जहां चिंताएं बढ़ गई हैं, वहीं उन्हें इस बात की भी उम्मीद है कि अलग मापदंड निर्धारित करके इन राज्यों का एनडीए सरकार भला कर सकती है।
अभी तक योजना आयोग ऐसे राज्यों की फेहरिस्त में से हिमाचल को ही झटके देता रहा है। 13वें वित्तायोग ने भी जहां अन्य राज्यों को 100 से 120 फीसदी मदद की सिफारिश की, वहीं हिमाचल के लिए विभिन्न मदों में यह 50 फीसदी या इससे भी कम रही। यानी हिमाचल की दलीलों को कई मर्तबा दरकिनार किया गया। यही वजह रही कि हिमाचल का ऋण बोझ अब 31 हजार करोड़ पार करने लगा है। सीमित संसाधनों से युक्त प्रदेश को केंद्र से उम्मीद है कि विशेष योजना सहायता के तहत दर बढ़़ाई जाएगी। वहीं विशेष केंद्रीय सहायता के अंतर्गत भी ज्यादा राशि का प्रावधान होगा। फिलवक्त हिमाचल को एनसीए यानी नॉर्मल सेंट्रल असिस्टेंस के तहत हर साल 100 से 120 करोड़ मिल रहा है, जबकि एससीए यानी स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस और एसपीए यानी स्पेशल प्लान असिस्टेंस के तहत सहायता नहीं मिल सकी है।
वित्त वर्ष 2014-15 के लिए प्रदेश की 4400 करोड़ की योजना पर फैसला न हो पाने से दिक्कतें बढ़ सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसके तहत प्रदेश 2600 करोड़ के लगभग उम्मीदें लगाए बैठा था। अब नए मापदंडों के तहत इनमें बढ़ोतरी भी हो सकती है। हिमाचल के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने ऋण की सीमा मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 2700 करोड़ निर्धारित की है। इसमें से प्रदेश अब तक 1100 करोड़ रुपए ही ऋण के तौर पर उठा सका है।
यानी दिक्कतें इतनी भी बड़ी नहीं हैं कि हिमाचल का आर्थिक ढांचा पूरी तरह से चरमरा जाए। जानकारों का कहना है कि यदि राज्य सरकार योजना आयोग के स्थान पर गठित की जाने वाली नई संस्था में हिमाचल जैसे विशेष श्रेणी राज्यों के प्रतिनिधित्व का भी मुद्दा उठाए तो आने वाले वक्त में यह एक कारगर कदम साबित हो सकता है। ऐसे में न तो हिमाचल की अनदेखी होगी, न ही आर्थिक संसाधनों के लिए प्रदेश को लोन या अन्य वित्तीय एजेंसियों की तरफ देखना पड़ेगा।