चण्डीगढ़, 2 फरवरी - राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि परपरांगत शिल्पों और कलाओं को बढावा देने के लिए इस क्षेत्र में अधिक निवेश करने, बुनियादी सुविधाएं बढाने और शिल्प उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है तथा इनका निर्यात भी बढाना चाहिए। वर्तमान में निर्यात क्षेत्र में इनका हिस्सा केवल दो प्रतिशत है।
राष्ट्रपति आज फरीदाबाद, सूरजकुंड में 27वें अतंर्राष्ट्रीय शिल्प मेले का विधिवत उद्घाटन करने उपरांत लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण परंपरागत शिल्प उत्पादों की बिक्री पर असर पडा है। इन क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से इनके उत्पादों को और अधिक लोकप्रिय बनाने में मदद मिलेगी।
श्री मुखर्जी ने विभिन्न क्षेत्रों में नवोन्मेष के लिए हरियाणा द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की । उन्होंने हरियाणा पर्यटन विभाग की विशेष रूप से प्रशंसा की और कहा कि इस मेले का पर्यटन की दृष्टि से बहुत महत्व है। उम्मीद है कि अन्य राज्य भी इस प्रकार के मेलों का आयोजन करेंगे।
राष्ट्रपति श्री मुखर्जी ने कहा कि यह मेला देश की विविध संस्कृति, परपरांगत शिल्प कलाओं और कलाओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है। थीम राज्य के रूप में मेले में इस वर्ष कर्नाटक ने अपनी वास्तुकला, शिल्पकलाओं और संस्कृति के विभिन्न रूपों का सराहनीय प्रदर्शन किया है। विदेश से आने वाले कलाकार, कारीगर और दर्शक, जहां एक ओर प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की झलक पाते हैं। वहीं, दूसरी ओर इसमें भाग लेने वाले देशों को अपनी संस्कृति और शिल्पों के प्रदर्शन का भी अवसर मिलता है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से इस मेले की गरिमा बढी है। श्री हुड्डा ने कहा कि इस वर्ष मेले में लगभग 800 शिल्पकार और बुनकर भाग ले रहे हैं। इनमें अफ्रीका, यूरेशिया और सार्क देशों के शिल्पकार और बुनकर भी हैं। इस बार के मेले का थीम राज्य कर्नाटक है, जो समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं का प्रदेश है। इस मेले का उददेश्य देश के हस्तशिल्पों, कला-कौशल और संस्कृति को प्रोत्साहन देना है। उन्होंने कहा कि देश के हस्तशिल्प और हथकरघे की इस मेले के कारण एक अलग पहचान बनी है और ग्रामीण शिल्पों को बढ़ावा मिला है। जहां मेले के माध्यम से कलाकारों और विशेष रूप से उभरते कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है, वहीं नई पीढ़ी को देश की धरोहर के बारे में भी जानकारी मिलती है। मेले के कारण लुप्त हो रही हस्तकलाओं का भी अनुरक्षण हो रहा है। श्री हुड्डा ने कहा कि मेले की बढ़ती लोकप्रियता तथा कारीगरों और पर्यटकों की बढती संख्या को देखते हुए मेले में सुविधाओं को बढाया गया है।
थीम राज्य कर्नाटक के पर्यटन मंत्री श्री आनंद सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि कर्नाटक एक प्रकार से विभिन्न प्रदेशों की संस्कृतियों का संगम है। वहां की वास्तुकला के नमूनों को यहां विभिन्न द्वारों पर प्रस्तुत किया गया है। ‘अपना घर’ में कर्नाटक की सामान्य जीवन-शैली की झलक मिलती है। प्रदेश की कला, नृत्य, नाट्य आदि को दर्शाने के लिए कर्नाटक के 300 से अधिक कलाकार मेले में भाग ले रहे हैं। प्रदेश के 150 से अधिक शिल्पकार और कारीगर अपने हुनर का प्रदर्शन करने के साथ-साथ अपने उत्पादों का भी प्रदर्शन कर रहे हैं। 9 फरवरी को कर्नाटक दिवस के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ-साथ फैशन-शो का भी आयोजन किया गया है।
हरियाणा के पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव श्री विजयवर्धन ने विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि मेले में शिल्पकलाओं के विभिन्न रूपों और रंगों के साथ-साथ लोक कलाओं और नृत्यों की झांकी प्रस्तुत की जा रही है।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य संसदीय सचिव श्री रामकिशन फौजी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल श्री जगन्नाथ पहाडिया, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री श्री महेन्द्रप्रताप सिंह, सूचना, जन सम्पर्क एवं सांस्कृतिक कार्य राज्य मंत्री पंडित शिव चरण लाल शर्मा, मुख्य संसदीय सचिव सुश्री शारदा राठौर, सांसद अवतार सिंह भडाना, विधायक आनंद कौशिक, रघुवीर तेवतिया, केन्द्रीय पर्यटन सचिव श्री परवेज दीवान, प्रधान सचिव श्री छतर सिंह और मीडिया सलाहकार श्री शिव भाटिया, पुलिस महानिदेशक श्री एसएन वशिष्ठ, कर्नाटक पर्यटन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरविंद जाधव, हरियाणा पर्यटन निगम के प्रबंध निदेशक श्री आनंद मोहन शरण के अलावा बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।