कूल्लू - हिमाचल के कूल्लू के जरी मलाणा गांव के समीप बहने वाले पाचोलिंग और मौजिंग नालों में बादल फटने से तबाही मच गई। पानी का बवंडर अपने साथ इमारती लकड़ी के 900 स्लीपर बहा ले गया। वहीं एक छोटे पुल का भी अब कहीं नामोनिशान नहीं बचा है। गनीमत यह रही कि फोरेस्ट कारपोरेशन के अधीन काम कर रहे दस मजदूरों की किसी तरह से जान बच गई। रात काटने के लिए पहाड़ी पर बनी गुफा में आश्रय लेने से मजदूर अनहोनी का शिकार होने से बाल-बाल बचे हैं। बाढ़ के तेज प्रवाह में मलाणा के आसपास काफी ज्यादा भू-कटाव हुआ है। मलाणा पंचायत की प्रधान माघो देवी ने खबर की पुष्टि की है।
वहीं सूचना पाकर कुल्लू प्रशासन की एक टीम प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए मलाणा के लिए रवाना हो गई है। दुनिया की सबसे पुरानी जम्हूरियतों में शुमार मलाणा गांव से सटे पाचोलिंग और मौजिंग नालों में गुरुवार तडक़े बादल फटने से ग्रामीणों में अफरा तफरी मच गई। जोरदार धमाके के साथ बादल फटा और देखते ही देखते एक दूसरे से बीस मीटर के फासले पर बहने वाले इन दोनों ही नालों ने रौद्र रूप धारण कर लिया। जंगल से कटान कर पास में ही ढेर लगाकर रखे गए फोरेस्ट कारपोरेशन के 900 स्लीपर बाढ़ में बह गए। वहीं पाचोलिंग पर बने पुल का भी नक्शे से नामोनिशान मिट गया है। फारेस्ट कारपोरेशन के गार्ड भगतराम ने बताया कि बादल फटने से नालों में आई भयंकर बाढ़ में रई के 800 , काइल के 50 तथा अखरोट के 50 स्लीपर बह गए हैं। जिससे लगभग सात लाख रुपए का नुकसान कारपोरेशन को झेलना पड़ा है। पार्वती वन मंडल के डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि पेड़ों की डिमार्केशन करके इनके कटान का काम फोरेस्ट कारपोरेशन को सौंपा गया था।