शिमला - मुख्य संसदीय सचिव रोहित ठाकुर ने पराला मंडी व ठियोग-हाटकोटी सडक़ के बारे पूर्व बागवानी मंत्री नरेन्द्र बरागटा द्वारा दिए गए बयान पर कड़ी आपत्ति जाहिर की है। ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार बागवानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है और सरकार ने हमेशा बागवानों के हित में निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि बरागटा दो मर्तबा प्रदेश के बागवानी मंत्री पद पर रहे परन्तु उन्होंने बागवानों के हितों के लिए कुछ भी नहीं किया। अब जब लोगों ने उन्हें नकार दिया है तब बागवानों के हित याद आ रहे हैं।
रोहित ठाकुर ने कहा कि अक्तूबर 2010 में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने पराला मंडी की आधारशिला रखी थी। इसके लिए पहले 400 करोड़ रुपये की घोषणा की गई परन्तु बाद में 100 करोड़ रुपये की घोषणा की गई परन्तु तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा प्रदेश के तीन बजट पेश करने के बावजूद इस मंडी के लिए एक भी रुपये के बजट का प्रावधान नहीं किया गया। इसके निर्माण के लिए 5.25 करोड़ रुपये की राशि तत्कालीन केन्द्रीय यूपीए सरकार द्वारा राष्ट्रीय कृषि योजना के तहत स्वीकृत की गई थी और शेष 8 करोड़ रुपये की राशि हिमाचल प्रदेश कृषि विपणन बोर्ड के अपने संसाधनों से की गई थी। शिमला, ढली तथा भट्टाकूफर मंडी का निर्माण भी कांग्रेस सरकार ने ही किया है।
ठाकुर ने ठियोग-हाटकोटी सडक़ पर बरागटा द्वारा की जा रही बयानबाजी को राजनीति से प्रेरित करार देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार सडक़ों को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। वर्ष 2007 में प्रदेश के लिए विश्व बैंक द्वारा 1365 करोड़ रुपये की 10 सडक़ परियेाजनाएं स्वीकृत की गई थी जिसमें ठियोग-हाटकोटी सडक़ भी शामिल थी। वर्ष 2007 में कांग्रेस सरकार ने इस सडक़ को चौड़ा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय निविदाएं आमंत्रित की थी, जबकि इसका कार्य तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा वर्ष 2008 में चाईना की कंपनी को सौंपा गया। बागवानों में वाह-वाही लूटने के लिए नव बर 2008 में तत्कालीन मु यमंत्री आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन भाजपा सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में इस सडक़ पर मात्र 18 प्रतिशत कार्य ही संपन्न हो पाया।
(एसएनएस के सौजन्य से)