शिमला - हिमाचल लोकहित पार्टी जिला शिमला प्रवक्ता देशबन्धु सूद ने ब्यान जारी करते हुए कहा कि धारा 118 को सरल करने की प्रक्रिया जनता के साथ धोखा है व इसे मूल हिमाचल निवासियों को बाहर करने की कोशिश बताया । उन्होने कहा कि 1972 में जब यह कानून बनाया गया था तो सबसे ज्यादा प्रभाव नए हिमाचल (मजऱ् एरिया) के लोगों को पड़ा था । आज भी यहां के स्थायी निवासीयों को 118 की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जबकि बाहरी लोगों के लिए नियम सरल किए जा रहे हैं।
देशबन्धु सूद ने आरोप लगाया कि इससे तो ऐसा लगता है कि जिन अधिकारियों व नेताओं ने यह कानून बनाया था उनकी जेबें भरने के बावजूद भी वे धारा 118 की प्रक्रिया को सरल केवल गैर हिमाचली लोगों के लिए बनाने जा रहे हैं ताकि जो कुछ भी बाकी बचा है उसे भी बाहर के लोगों को बेच दिया जाए । यह सब उन जमीनों को रेगुलराईज़ करने की प्रक्रिया है, जिन्हें बड़े अधिकारियों एवं नेताओं ने गलत तरीके से पूर्व में हिमाचल में हथिया लिया है। अगर आज यह प्रक्रिया ठीक है तो यह कानून क्यों बनाया गया था? माननीय उच्च न्यायालय ने भी इस कानून को प्रदेश हित में बताया है, जब यह केस उच्च न्यायालय में विचाराधीन था तो क्यों इसकी पैरवी नहीं की गई?
देशबन्धु सूद ने कहा कि आज जो सर्कल रेट है, उससे क्या यहां का स्थायी निवासी जमीन खरीद पाएगा, यह सोचने का विषय है । अगर करना ही है तो प्रदेश की जनता से माफी मांग कर इस धारा 118 को ही समाप्त कर देना चाहिए क्योंकि गैर हिमाचली लोगों ने इस कानून की धज्जियां उड़ा कर अरबों रुपये की जायदादें व बगीचे बनाए हैं । उन्होने कहा कि सरकार दोषी अधिकारियों को न्याय स मत दंड दे अन्यथा हिमाचल लोकहित पार्टी धारा 118 के इस कथित सरलीकरण के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अवमानना का दावा और दोषी अधिकारियों एवं व्यक्तियों द्वारा अर्जित स पश्रियों का सरकारी अधिग्रहण करने की अपील करेगी ।
(एसएनएस के सौजन्य से)