चंडीगढ़ - हरियाणा के जेल महानिदेशक यशपाल सिंगल ने कहा कि हरियाणा की सभी 19 जेलों में बंदियों को दूरभाष सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। प्रीजन इनमेट कालिंग सिस्टम नामक इस सुविधा के माध्यम से अब बंदी अपने माता-पिता, पति-पत्नी, बच्चों, पारिवारिक सदस्यों, सगे-संबधियों और रिश्तेदारों से दूरभाष पर बातचीत कर सकेंगे।
सिंगल ने आज यहां बताया कि उन्होंने आज अम्बाला केन्द्रीय कारागार से प्रदेश के बंदियों के लिए यह सुविधा आरम्भ की। उन्होंने बताया कि जून मास के प्रथम सप्ताह तक प्रदेश की सभी जेलों में यह सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली और चंडीगढ़ में दूरभाष की सुविधा पहले से उपलब्ध है लेकिन हरियाणा में उपलब्ध करवाई गई इस सुविधा से वह काफी मंहगी है। उन्होंने बताया कि एटीएमनुमा मशीन के माध्यम से उपलब्ध करवाई गई इस सुविधा से बंदी एक रूपए में लोकल काल और 1.25 रुपए प्रति मिनट में एसटीडी काल कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह में एक बंदी को 10 मिनट के लिए यह सुविधा प्रयोग करने की छूट दी गई है। इस सुविधा के आरम्भ होने से बंदी अपने परिजनों से बातचीत करके तनावमुक्त हो सकेंगे। इसके साथ-साथ मुलाकात करने वालों की तादाद में कमी आएगी तथा निकट सम्बन्धियों को मुलाकात के लिए दूर-दूर की जेलों में जाने के लिए धन और समय की बर्बादी से भी निजात मिलेगी।
सिंगल ने बताया कि इस सुविधा का लाभ हासिल करने के लिए जेल में बंद बंदियों को अपने सगे सम्बन्धियों के दो टैलिफोन अथवा मोबाईल नम्बर, जिन पर पोस्टपेड सेवा उपलब्ध हो, जेल अधीक्षक को उपलब्ध करवाने होंगे। इन टैलिफोन नम्बरों की पूर्णत: जांच के बाद बंदियों को उनके द्वारा दिए गए दो नम्बरों पर यह सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। इन नम्बरों पर बंदी सप्ताह में दो बार अपने परिजनों और निकट सम्बन्धियों से बातचीत कर सकेंगे। यह सुविधा उपलब्ध करवा रही इंडस कम्पयूटर्स कम्पनी के मालिक महीपाल राठी ने बताया कि इस मशीन पर कैदी की बातचीत का समय नोट होगा और वह बंदी को भी नजर आएगा। इसके लिए बंदी को एकमुश्त कुछ राशि जमा करवानी होगी तथा बातचीत के दौरा बंदी को शेष राशि का ब्यौरा भी स्क्रीन पर दिखाई देगा। बंदी केवल दिन के समय ही इस सुविधा का लाभ हासिल कर सकेगा।
जेल महानिदेशक ने कहा कि प्रदेश की सभी जेलों में मुलाकात के दौरान बंदियों को आने वाली परेशानी को दूर करने के लिए मुलाकात कक्षों को आधुनिक बनाया जा रहा है। इस सुविधा पर 3.87 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा रही है। मुलाकात के लिए अलग-अलग कैबिन बनाए जाएंगे जिनमें बुलेटप्रूफ शीशा लगा होने के कारण बंदी और उसके परिजन एक-दूसरे को सही प्रकार से देख पाएंगे। कैबिन के अंदर और बाहर इंटरकोम पर वे एक-दूसरे से सही प्रकार से बातचीत भी कर पाएंगे।
सिंगल ने कहा कि जेलों में बंदियों और कैदियों को दी जाने वाली सब्जियां बाजार से खरीदी जाती थी, जो ताजी नही होती थी। अब प्रदेश की सभी जेलों में उपलब्ध स्थान में जेल अधीक्षकों को कैदियों और बंदियों के सहयोग से सब्जियां उगाने के निर्देश दिए गए हैं और वहीं की ताजी सब्जी उन्हें उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे न केवल दवाई के छिडकाव से मुक्त ताजी सब्जियां उपलब्ध होंगी बल्कि बंदियों और कैदियों को अपना खाली समय भी सही तरीके से व्यतीत कर पाएंगे।
जेल महानिदेशक ने बताया कि प्रदेश की जेलों में सेवारत जेल वार्डनों को भी पुलिस कर्मियों की तर्ज पर पांच हजार रुपए मासिक रिस्क अलाउंस की सुविधा दी जाएगी। यह सुविधा उपलब्ध करवाने पर लगभग 20 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा।