चंडीगढ़ - हरियाणा सरकार जल्द ही प्रदेश के अस्पतालों को अस्पताल सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली से जोडऩे जा रही है, जिसके अंतर्गत मरीज एक ही पंजीकरण संख्या पर प्रदेश के किसी भी सरकारी चिकित्सा संस्थान में उपचार सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
इस आश्य की जानकारी मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा स्वास्थ्य मिशन की बैठक में दी गई। बैठक में वित्त मंत्री हरमोहिन्द्र सिंह चट्ठा, स्वास्थ्य मंत्री राव नरेन्द्र सिंह तथा शहरी स्थानीय निकाय मंत्री सावित्री जिंदल भी उपस्थित थीं।
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवराज संधू ने हुड्डा को अवगत करवाया कि हरियाणा राज्य स्वास्थ्य संसाधन केन्द्र के सहयोग से विकसित की जा रही इस प्रणाली के माध्यम से सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों के रिकार्ड को इस प्रकार एकीकृत किया जायेगा कि मरीज के नाम, पता या दूरभाष नम्बर से पूरा रिकार्ड उपलब्ध हो जायेगा। प्रणाली के क्रियान्वयन के बाद अस्पताल आने पर मरीज को बार-बार पंजीकरण नहीं करवाना होगा तथा मरीज का पूरा रिकार्ड सभी सरकारी अस्पतालों में आनलाइन उपलब्ध होगा। इस प्रकार, उपचार से पूर्व चिकित्सकों के पास मरीज की पूरी केस-हिस्ट्री होगी, जिससे पता चल जाएगा कि मरीज द्वारा कहां-कहां तथा कब-कब क्या इलाज करवाया गया।
संधू ने बताया कि सरकारी चिकित्सा संस्थानों के प्रशासनिक कार्यों के प्रबंधन के लिए विभाग पब्लिक हैल्थ कॉडर सृजित करने जा रहा है। इसके लिए एक प्रोटोटाइप मॉडल विकसित किया गया है, जिसे जल्द लागू किया जायेगा। इसका उद्देश्य चिकित्सकों को प्रशासनिक कार्यों के दायित्वों से मुक्त करना है ताकि वे क्लीनिकल कार्यों पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दे सकें। उन्होंने बताया कि प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में सुधार को लेकर व्यापक रणनीति बनाई गई है, जिसके अंतर्गत उच्च जोखिम के गर्भावस्था मामलों में गर्भवती महिलाओं को लाल ओपीडी कार्ड जारी किये जायेंगे।
बैठक में बताया गया कि केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2012-13 के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में किये गये सुधार तथा धनराशि का समय पर उपयोग करने एवं केन्द्रीय व्यय विभाग द्वारा लगाई गई शर्तों की अनुपालना करने में उत्कृष्टï प्रदर्शन करने पर हरियाणा सरकार की सराहना की है। इस दौरान राज्य सरकार राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के बजट आवंटन में 18 प्रतिशत की कटौती के बावजूद प्रदेश के लिए अनुमोदित बजट से ज्यादा धनराशि प्राप्त करने में सफल रहा थी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हरियाणा के मिशन निदेशक डॉ राकेश गुप्ता ने बैठक में अवगत करवाया कि हरियाणा में 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान स्वास्थ्य सूचकांक में काफी सुधार देखने को मिला है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, लिंगानुपात तथा संस्थागत प्रसूतियों की दर सुधरी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 तक शिशु मृत्यु दर को 42 से कम करते हुए 28 तक लाने, नवजात मृत्यु (28 दिन की आयु पूरी न करने वाले शिशु) दर को 28 से 23 करने, मातृ मृत्यु दर को 146 से 80 करने, लिंगानुपात को 879 से 950 तक लाना तथा संस्थागत प्रसूतियों को शत प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि विभाग के निरंतर प्रयासों से राज्य में संस्थागत प्रसूति दर 84.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कुल टीकाकरण की दर 60 प्रतिशत से 76 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव एस सी चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एस एस ढिल्लो, डॉ के के खण्डेलवाल, उप प्रधान सचिव आर एस दून, वित्त विभाग के अतिरिक्त प्रधान सचिव राजन गुप्ता के अलावा कई अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।