चंडीगढ़ - हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये चलाये जा रहे अपने अभियान के तहत अकादमी सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय व्यंग्य कुंभ एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
अकादमी के निदेशक डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ ने आज इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम राष्ट्रीय व्यंग्य कुंभ में डॉ. शेरजंग गर्ग, सुप्रसिद्घ कवि एवं समालोचक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्घ समालोचक एवं चिंतक डॉ. निर्मला जैन ने की।
उन्होंने कहा हरियाणा के लोक मानस में व्यंग्य विनोद की बहुलता है। व्यंग्य और विनोद का चोली दामन का साथ है। यहा का जनमानस कठिन परिस्थितियों में भी हंसने की क्षमता रखता है। उन्होंने इस अवसर पर दो हरियाणवी लोक कथाएं भी सुनाई।
उन्होंने बताया कि यह राष्ट्रीय व्यंग्य कुंभ हरिगंधा के व्यंग्य विशेषांक पर आधारित था। इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों द्वारा हरिगंधा के अप्रैल-मई 2014 व्यंग्य विशेषांक का लोकार्पण भी किया गया।
व्यंग्य के सुप्रसिद्घ साहित्यकार पदमश्री श्री लीलाधर जगूड़ी ने कहा की व्यंग्य की सर्वव्यापकता को सीमित ना करके संपुष्ट किया जाए क्योंकि व्यंग्य ही व्यंजना का सबसे बड़ा हथियार है। इसे हास्य तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि व्यंग्य में तो आंख से आंसू भी बहना चाहिए। कुछ लोग तुकबंदी को पद्य और गद्य का आधार मानते हैं। क्या कोई ऐसा व्यंग्य है जिसे सुन कर कोई रो पड़ा हो।
इस अवसर पर डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी, प्रताप सहगल, सुशील सिद्घार्थ, डॉ. लालित्य ललित, अशोक आनन्द, डॉ. शेरजंग गर्ग, जसविंदर शर्मा, राजकुमार निजात, राजेन्द्र निशेष, डॉ. हरीश नवल, डॉ. सुदर्शन वशिष्ठ, तरसेम गुजराल और यज्ञ शर्मा आदि अपनी-अपनी प्रस्तुतियां दी।