चण्डीगढ़ - हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा महाकवि संत सूरदास के 536 वें जन्मोत्सव के मौके पर महाकवि की पावन जन्म स्थली ग्राम सिही, फरीदाबाद स्थित सूर स्मारक स्थल के पंरागण में गत सांय राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया । कवि सम्मेलन की अध्यक्षता जाने माने वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षाविद एवं कवि आचार्य बलदेव राज शांत ने की। कार्यक्रम का आयोजन महाकवि संत सूरदास स्मारक ट्रस्ट सिही के सहयोग से किया गया ।
अकादमी के निदेशक डा0 श्याम सखा श्याम, ट्रस्ट के अध्यक्ष पं0 जयदेव शर्मा तथा आचार्य शांत सहित सभी कवियों, पदाधिकारियों व गणमान्य व्यक्तियों ने महाकवि संत सूरदास की प्रतिमा पर माल्यार्पंण करके कवि सम्मेलन का शुभारम्भ किया।
गाजियाबाद से पधारी कवियित्री डा0 मधु भारतीय ने सूरदास की महिमा का बखान करते हुए कवि सम्मेलन की शुरूआत कुछ इस तरह की -
इतना सुन्दर कहां था सूरदास से पहल बचपन,
उनके कान्हा की हर मुद्रा , पर न्यौछावर तन-मन-धन ।
दिल्ली से आए कवि महेन्द्र शर्मा की काव्य शब्दलडियां थी ---
कुछ करके दिखाओ किसी के लिए , हाथ गम से मिलाओ किसी के लिए,
घर तुम्हारा उजालों से भर जाएगा , इक दीया तो जलाओ किसी के लिए।
कवियित्री मीनाक्षी जिजीविषा ने अपनी रचना कुछ इस अंदाज में बयां की --
क्षण मेरा अटल निकलेगा , दल में से भी दल निकलेगा,
नेताओं पर यकीन हो कैसे भला ,क्या रस्सी से बल निकलेगा ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्य शांत ने सूर की काव्य तपस्या का चित्रण अपने अनूठे अन्दाज में इस तरह किया ---
सूर सरीखी साधना कहां करेगा कौन,
माधव मुरली में मगन मन मन्दिर में मौन ,
नयन नूर बिन सूर ने देखा सब संसार,
कविता कामिनी कंस को कैसे सकें बिसार।
अकादमी के निदेशक डा0 श्याम सखा श्याम ने अपनी यह रचना पढ़ कर कवि सम्मेलन का समापन किया---
मैं न मजहब लिखता हूं न जात लिखता हूं,
दिल में आ जाए बस वही तो बात लिखता हूं,
मुझ से कुछ और उम्मीद मत रखना दोस्तो,
मैं तो आज भी दिन को दिन, रात को रात लिखता हूं।