चण्डीगढ़, 28 जनवरी- हरियाणा की आबकारी एवं कराधान मंत्री श्रीमती किरण चौधरी ने आज राज्य वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति और केन्द्र वित्त मंत्रालय से देश में शीघ्र टैक्स सुधार लाने के लिए दृढ़ता से कार्य करने का आग्रह किया है।
श्रीमती चौधरी आज भुवनेश्वर में राज्य वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में बोल रही थीं।
उन्होंने कहा कि गुडस एंड सर्विस टैक्स(जीएसटी) को शुरू करने में कुछ समय लग सकता है, इस दौरान यह भी समान रूप से महत्वपूर्ण है कि गुडस एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) की दर 4 प्रतिशत से कम करके 2 प्रतिशत करने के कारण राज्यों को हो रहे नुकसान की पूरी तरह से प्रतिपूर्ति केन्द्र सरकार द्वारा की जाए। उन्होंने कहा कि सीएसटी संग्रहण को लगभग 38 प्रतिशत के प्रदर्शन से गहरा धक्का लगा है। सीएसटी की दर में कमी के कारण और केन्द्र सरकार द्वारा मुआवजे की अदायगी न करने के कारण राज्य को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने इसके लिए उचित कदम भी उठाएं जाने पर बल दिया।
श्रीमती चौधरी ने कहा कि हरियाणा ने दिसम्बर-2012 तक वैट संग्रहण में वर्ष 2011
की इसी अवधि की तुलना में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्घि दर्शायी। उन्होंने कहा कि दिसम्बर-2011 तक कुल वैट संग्रहण लगभग 9150 करोड़ रुपये था जो वर्ष2012 की चालू अवधि के दौरान 10709 करोड़ रुपये हो गया है। वैट संग्रहण का राजस्व हरियाणा में फिर भी संतोषजनक है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा एक महत्वपूर्ण उत्पादक और निर्यातक राज्य है, जिसके परिणामस्वरूप इसे सीएसटी की दर में कमी और केन्द्र सरकार द्वारा मुआवजे की अदायगी न करने के परिणामस्वरूप भारी नुकसान हो रहा है। यदि वर्ष 2011-12 के दौरान मुआवजा 75 प्रतिशत और वर्ष 2012-13 के दौरान 50 प्रतिशत के लिए समिति की सिफारशें स्वीकार की जाती हैं तो राज्य को लगभग2600 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। हरियाणा जैसे छोटे राज्य के लिए यह एक बहुत बड़ा नुकसान है। उन्होंने कहा कि सीएसटी मुआवजे पर समिति द्वारा वर्णित परिस्थितियों के दृष्टिगत हम सिफारशें स्वीकार करते हैं।
उन्होंने कहा कि हालांकि समिति ने मुआवजा को जारी करने के सम्बन्ध में कोई समय अवधि निर्धारित नहीं की है। हम चाहंगे कि रोके गए मुआवजे की समस्त राशि चालू वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान आंशिक रूप से जारी की जाए तथा शेष राशि आगामी वित्त वर्ष यानि कि वर्ष 2013-14 के दौरान जारी की जाए। वर्ष2013-14 से अधिक का समय बढ़ाया गया तो राज्य को न केवल कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा बल्कि अनेक अनपेक्षित जटिलताएं भी उत्पन्न हो जाएंगी।
उन्होंने कहा कि केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के कर्मचारियों ने एक गम्भीर गणनात्मक भूल की है जिसके परिणामस्वरूप मारूति उद्योग लिमिटेड को दिए गए एक प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देने के कारण हरियाणा के मुआवजा दावे से दोगुनी कटौती हुई है। हरियाणा राज्य को उसका मुआवजा दावा पूरा करने की बजाय इस नुकसान के लिए जिम्मेवार ठहराया, परन्तु केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने इसके लिए दोगुनी कटौती की है। मैं केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधियों से इस समस्या के शीघ्र समाधान के लिए अनुरोध करूंगी और मैं अधिकार प्राप्त समिति से भी इसके समाधान का अनुरोध करती हूं कि भविष्य में राज्यों के देय मुआवजा दावों को अन्तिम रूप देते हुए राज्यों के अधिकारियों के साथ पूर्व परामर्श किया जाए ताकि ऐसी त्रुटियों से बचा जा सकें।
उन्होंने कहा कि यदि सीएसटी की दर दो प्रतिशत रखी जाती है तो राज्यों का आरएनआर गिर जाएगा और यह लगभग 12.50 प्रतिशत आ जाएगा। तदानुसार राज्यों का आरएनआर 12 से 13 प्रतिशत के उचित स्तर पर रखने के लिए वास्तव में जीएसटी के क्रियान्वित किए जाने के बाद भी सीएसटी की दर दो प्रतिशत रखे जाने की आवश्यकता है।