चण्डीगढ़, 28 जनवरी- हरियाणा सरकार द्वारा राज्य में उपलब्ध पशुधन को विकसित करने के उद्देश्य से राज्य पशुधन मिशन स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यह मिशन प्रदेश के पशुधन की संतति को विकसित करने के साथ-साथ पशुधन विकास से सम्बन्धित योजनाओं पर भी कार्य करेगा।
हरियाणा के कृषि मंत्री श्री परमवीर सिंह ने आज चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कृषि ऑडिटोरियम में आयोजित द्वितीय वार्षिक पशुधन दिवस समारोह में उपस्थित वैज्ञानिकों एवं वरिष्ठ फैक्लटी सदस्यों को सम्बोधित करते हुए दी। यह समारोह लाला लाजपतराय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित किया गया था।
श्री परमवीर सिंह ने कहा कि राज्य में उपलब्ध पशुधन की पहचान करना विभाग की प्राथमिकता है। इसके साथ-साथ पशुओं के चारे की पैदावार को बढाना तथा किसानों को गुणवत्तायुक्त चारा उपलब्ध करवाना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए सरकार वैज्ञानिकों के साथ मिलकर इस दिशा में कार्य कर रही है। हमारे प्रदेश में सीमन की उत्पादकता उच्च गुणवत्ता की है तथा इस क्षेत्र में हमे ए-ग्रेड सर्टिफिकेट मिला हुआ है। हिसार में 7 करोड़ रूपये की लागत से एक नया आधुनिक सीमन उत्पादक युनिट स्थापित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जाएगा ताकि किसानोें को पशुधन नुकसान होने पर मुआवजा दिया जा सकें। इसके लिए एक कॉर्पस फण्ड बनाया जाएगा। इस योजना के तहत पालतू पशुओं के लिए कम्पनसेटरी इंश्योरेंस योजना शुरू की जाएगी, जिसमें किसानों के पशुधन की हानि की स्थिति में उन्हें मुआवजा देकर उनके नुक्सान की भरपाई की जा सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए उन्हें कृषि से जुड़े व्यवसायों को अपनाने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार पशुपालन व डेयरी विकास को बढावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में चलाए गए निःशुल्क टीकाकरण के कारण मुंहखुर बीमारी पर पूर्णतया नियन्त्रण पा लिया गया है। इसके साथ-साथ पशुओं में होने वाले गलघोटू, पीपीआर जैसी बीमारियों को भी काफी हद तक काबू कर लिया गया है।
इस अवसर पर श्री एम.एल. मदान ने कहा कि गतवर्षो में हमारे प्रदेश में कृषि उत्पादकता के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई जिसमें पशुधन उत्पादकता का बहुत बड़ा हाथ है। फसली क्षेत्र में जहां जी.डी.पी. में 27 हजार करोड़ रूपये की वृद्धि हुई है, वहीं पशुधन के क्षेत्र में 18 हजार करोड़ रूपये की वृद्धि दर्ज की गई है। हमे किसानों के लाभ के लिए इस क्षेत्र में सतत विकास के लिए कदम उठाने होेंगे क्योंकि पशुधन के क्षेत्र में होने वाले उत्पादकता उसमें लगने वाली लागत से कहीं ज्यादा है। उन्होंने राज्य के पशुधन विकास के लिए नौ सुत्रीय कार्यक्रम की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिसमें पशुधन की संतति विकसित करने, दुग्ध उत्पादकता बढाने, पशुओं के लिए पौष्टिक चारे की उपलब्ध सुनिश्चित करने तथा पालतू पशुओं का रजिस्ट्रेशन करना प्रमुख है। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ पशुधन से मिलने वाले उत्पादों के लिए बाजार भी विकसित करने होंगे।
महानिदेशक, हरियाणा पशुपालन विभाग श्री डी.एस. डांगी ने कहा कि हमारे प्रदेश में देश का सबसे उत्कृष्ट पशुधन उपलब्ध है। मुर्रा नस्ल की भैंस के उत्पादन हमारे प्रदेश में ही होता है। कृत्रिम गर्भाधान के क्षेत्र में भी हमने आशातीत प्रगति की है परन्तु अब भी हम इस दिशा में हमे और कार्य करना बाकी है। इस दिशा में थोड़ा भी प्रयास करने से हमे बहुत बड़े परिणाम मिल सकते है जिससे किसानों व पशुपालकों को फायदा पंहुचेगा।
समारोह में मुख्यातिथि श्री परमवीर सिंह ने लाला लाजपतराय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर लाला लाजपतराय पशु चिकित्सा एवं पशुविज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डा. आर.एस. खोखर, पशु पालन विभाग के प्रधान सचिव श्री पी. के. दास सहित वरिष्ठ वैज्ञानिक,प्रोफेसर एवं पशु पालन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।