चंडीगढ़, 14 जनवरी - हरियाणा के उद्योग एवं लोक निर्माण मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि विश्व में साधारण और असाधारण लोगों के लिए कुरुक्षेत्र एक चिंतन का विषय है। भारत को समझने के लिए कुरुक्षेत्र को जानना जरूरी है। इस धरा को अध्यात्म और चिंतन की पालना स्थली के रूप में भी देखा जा सकता है।
श्री सुरजेवाला कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के सीनेट हाल में पर्यटन एवं सांस्कृतिक के प्रधान सचिव श्री विजय वर्धन द्वारा लिखित पुस्तक ‘कुरुक्षेत्र- टाइमलेस सैंससिटी’ का विमोचन करने के उपरांत बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में आध्यात्मिक तरंगों से कर्म करने और दूरगामी सुखद परिणामों का अहसास होता है। यह आश्चर्य से बात है कि कुरुक्षेत्र विषय इतना ज्यादा विस्तृत है कि इसको शब्दों में समेटा नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि विजय वर्धन द्वारा इस विषय को चुनकर निश्चित ही मानवता की सेवा करने की तरफ एक कदम बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि लेखक द्वारा पुस्तक के 30 पन्नों को अपने हाथों से लिखा और यह अपने आप में एक अनुकरणीय कार्य है।
पुस्तक के लेखक श्री विजय वर्धन ने कहा कि इस पुस्तक को लिखने में आनंद की प्राप्ति हुई है। कठिन विषय को चुनने के बाद अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। देश-विदेश के पुस्तकालयों में जाकर अध्ययन करना पड़ा। इसके अलावा, अपने मन की उलझनों को दूर करने के लिए साध, सूफी तथा संतों का भी सहारा लिया।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डीडीएस संधू ने कहा कि यह पुस्तक एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। इस पुस्तक के माध्यम से कुरुक्षेत्र को यूनेस्को में वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा लेने के लिए महत्वपूर्ण योगदान लिया जाएगा।
कुरुक्षेत्र के उपायुक्त श्री मंदीप सिंह बराड़ ने कहा कि यह किताब अपने-आप में महत्वपूर्ण विषय है। आज कुरुक्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय पटल पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। ऐसे मौके पर इस पुस्तक का विमोचन इस शहर के लिए महत्वपूर्ण क्षण साबित होंगे।
हरियाणा राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण के चेयरमैन एचएस राणा ने कहा कि इस पुस्तक में कुरुक्षेत्र 48 कोस की परिधि में आने वाले 5 जिलों के इतिहास पर बारीकी से प्रकाश डाला गया है। यह पुस्तक हरियाणा प्रदेश में एक मानव सेवा के रूप में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
श्री विजय वर्धन को पुस्तक लिखने में 6 सालों की अथक मेहनत लगी है और फोटोग्राफर अतुल शर्मा ने जींवत दृश्यों को अपने कैमरे में कैद कर इस पुस्तक को नया रूप देने का प्रयास किया है। सोशल एंटरपरनयोर एवं एनएबलर विक्रम जीत शारदा, पुस्तक के प्रकाशक शोभित आर्य, अमिना आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।