चण्डीगढ़ - हरियाणा के राज्यपाल श्री जगन्नाथ पहाडिय़ा की पुस्तक हाशिए से मुख्यधारा तक की पहली प्रति आज नई दिल्ली में राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी को भेंट की गई। इस पुस्तक का विमोचन राज्यसभा सांसद और भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद के अध्यक्ष डा0 कर्ण सिंह ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में किया।
राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि श्री जगन्नाथ पहाडिय़ा ने स्वतंत्र भारत के उद्भव को अपनी आंखों से देखा है कि किस प्रकार लोकतंत्र की जड़ें देश में मजबूत हुईं। डा0 कर्ण सिंह भी जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के बाद से भारत के इतिहास के साक्षी रहे हैं। श्री पहाडिय़ा को पंडित जवाहर लाल नेहरू, श्री लाल बहादुर शास्त्री, श्री कामराज, मौलाना आजाद, श्री मोरारजी देसाई, श्री जगजीवन राम जैसे महान नेताओं का आशीर्वाद मिला। 25 वर्ष की आयु में श्री पहाडिय़ा 1957 में देश की दूसरी लोक सभा के सदस्य बने और बाद में चौथी, पांचवीं तथा सातवीं लोक सभा के सदस्य भी रहे। वे केन्द्रीय मंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री और बिहार के राज्यपाल रहे और अब वे हरियाणा के राज्यपाल हैं। उन्होंने हमेशा अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी, सच्चाई और निष्ठा के साथ निभाया। आत्मकथा के रूप में पुस्तक लिखने के लिये श्री पहाडिय़ा को बधाई देते हुए श्री मुखर्जी ने कहा कि उनका जीवन उपलब्धियों से भरा है। उन्होंने श्री पहाडिय़ा को हर प्रकार का सहयोग देने के लिये उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शांति पहाडिय़ा को भी बधाई दी।
डा0 कर्ण सिंह ने 27 मार्च को हुई विमान दुर्घटना में श्री पहाडिय़ा के बाल-बाल बचने को परमात्मा की असीम कृपा बताते हुए श्री पहाडिय़ा को बधाई दी। डा0 कर्ण सिंह ने कहा कि श्री जगन्नाथ पहाडिय़ा की कहानी नये भारत की और प्रजातंत्र की कहानी है। देश के बड़े-बड़े नेताओं से उनका सम्पर्क रहा। वे सांसद बने, केन्द्रीय मंत्री बने, मुख्यमंत्री और राज्यपाल बने। एक गरीब परिवार में पैदा होना, मीलों पैदल चल कर पढ़ाई करने जाना और अनेकों कष्ट झेलते हुए जीवन में इस स्थिति तक पहुंचना निश्चय ही भारतीय संस्कृति की अद्भुत शक्ति का परिचायक है।
श्री जगन्नाथ पहाडिय़ा ने कहा कि यह मेरे लिये सौभाग्य की बात है कि भारत के राष्ट्रपति की गरिमामय उपस्थिति में डा0 कर्ण सिंह जैसी महान हस्ती के कर कमलों से मेरे जैसे साधारण व्यक्ति की पुस्तक का लोकार्पण हुआ। परिवारजनों और मित्रों के आग्रह पर मैंने अपनी याददाश्त के आधार पर संस्मरणों को कलमबद्ध किया है और बिना किसी संकोच के निजी, सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक घटनाक्रम को शब्दों में पिरोया है। गांधी जी और पंडित नेहरू के समभाव के आदर्श को सामने रखते हुए हमेशा मेरा यह प्रयास रहा है कि मैं गरीबों, जरूरतमंदों और पिछड़े लोगों के लिये कुछ कर सकंू। मुझे जीवन में जो कुछ भी मिला, वह मेरी इच्छाओं और अपेक्षाओं से बहुत ज्यादा है। आशा है मेरे संस्मरण पाठकों को पसन्द आएंगे और यदि उनके लिये थोड़े बहुत लाभप्रद रहे, तो मैं समझूंगा कि मेरा लेखन सफल रहा। श्री पहाडिय़ा ने प्रोत्साहन के लिये श्री मुखर्जी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने पुस्तक का विमोचन करने के साथ-साथ पुस्तक के लिये प्राक्कथन लिखने के लिये डा0 कर्ण सिंह का भी धन्यवाद किया।
समारोह में जाने-माने पत्रकार वेद प्रताप वैदिक ने कहा कि श्री पहाडिय़ा ने ‘हाशिए से मुख्यधारा तक’ पुस्तक में विभिन्न घटनाओं का सही-सही वर्णन करते हुए न किसी को उठाया है और न ही गिराया है। उनकी लेखनी में शालीनता और विनम्रता की झलक है।
पुस्तक की प्रकाशक कम्पनी एस. चंद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमित गुप्ता ने राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी, डा0 कर्ण सिंह और समारोह में मौजूद अतिथियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस पुस्तक का प्रकाशन करना वास्तव में उनके लिये गर्व की बात है।
समारोह का संचालन करते हुए हरियाणा सरकार के प्रधान सचिव डा0 के.के. खण्डेलवाल ने कहा कि यह पुस्तक श्री जगन्नाथ पहाडिय़ा के जीवन संघर्ष, आत्मविश्वास और साहस की कहानी है कि राजस्थान की तत्कालीन भरतपुर रियासत के एक छोटे से गांव में एक गरीब अनुसूचित परिवार में जन्म लेकर वे किस प्रकार जीवन में इस मुकाम तक पहुंचे।