चंडीगढ़, ब्यूरो। हरियाणा कांग्रेस के 19वें अध्यक्ष बने सिरसा के सांसद अशोक तंवर के लिए प्रारंभिक दौर में कांग्रेस के अध्यक्ष पद किसी कांटों से भरे ताज से कम नहीं है। अशोक तंवर ऐसे समय में कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है जब पार्टी को भीतरी तथा बाहरी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अशोक तंवर को विरासत में ढेरों चुनौतियां मिली हैं। 12 फरवरी 1976 को जन्मे अशोक तंवर पांच वर्ष तक युवा कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं। 90 के दशक में छात्र संगठन एनएसयूआई के माध्यम से राजनीति में प्रवेश करने वाले अशोक तंवर को सबसे कम उम्र में अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव के पद तक पहुंचने का गौरव प्राप्त है। जनवरी 2005 में अशोक तंवर को अखिल भारतीय युवा कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया।
अब सोमवार को उन्हें हरियाणा कांग्रेस की कमान सौंपी गई है। हरियाणा कांग्रेस में इस समय 70 फीसदी नेता ऐसे हैं जिनकी आयु अशोक तंवर से अधिक है। ऐसे में उन्हें पार्टी के पुराने नेताओं को नई विचारधारा के साथ चलाने में कई तरह की दिक्कते पेश आएंगी।
लोकसभा चुनाव की घोषणा किसी भी समय हो सकती है। अशोक तंवर को कांग्रेस पार्टी कई धड़ों में बंटी हुई मिली है। गुडग़ांव के सांसद राव इंद्रजीत बगावत कर चुके हैं। कई विधायक खुलेआम सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। सत्ता और संगठन के बीच तालमेल का भारी अभाव है। सत्ता और संगठन के लोगों को एक मंच पर लाने के लिए अशोक तंवर के पास महज एक माह का समय है। इस बीच उन्हें कांग्रेस के सभी धड़ों को एक मंच पर लाकर विपक्षी दलों के खिलाफ अपना एजेंडा जारी करना होगा।
केंद्र तथा हरियाणा में इस समय राजनीतिक माहौल कांग्रेस के समर्थन में नहीं है। हरियाणा में इस बार कांग्रेस को इनेलो,भाजपा, हजकां के अलावा आम आदमी पार्टी से भी चुनौती मिलेगी। दूसरी तरफ इनेलो,भाजपा और हजकां में महागठबंधन की चर्चा भी पूरे जोरों पर है। ऐसे हालातों में लोकसभा चुनाव अशोक तंवर के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं होंगे। तंवर के नेतृत्व में लड़े जाने वाले लोकसभा चुनाव ही हरियाणा में कांग्रेस का भविष्य तय करेंगे, क्योंकि हुड्डा सरकार का कार्यकाल भी इस वर्ष समाप्त हो रहा है।