चंडीगढ़, ब्यूरो। गुटों में उलझी हरियाणा कांग्रेस में कई वर्षों की जद्दोजहद के बाद सोमवार को हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना की छुट्टी हो गई। मुलाना का पूरा कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है। विवादों के बावजूद फूलचंद मुलाना बतौर अध्यक्ष लंबे समय तक कार्य करके रिकार्ड बनाने में कामयाब रहे हैं। छह वर्ष पांच महीने अध्यक्ष रहे मुलाना के नेतृत्व में हुए अधिकतर चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन कुछ अच्छा नहीं रहा है। फूलचंद मुलाना ने 27 जुलाई 2007 को कांग्रेस अध्यक्ष पद पर कार्यभार संभाला था।
जुलाई 2011 में उनका कार्यकाल समाप्त हो गया पर पार्टी ने उनकेनेतृत्व में ही अक्तूबर 2011 का हिसार उपचुनाव जबकि नवम्बर 2011 के रतिया एवं आदमपुर उपचुनाव लड़े। हिसार में कांग्रेस प्रत्यशी जयप्रकाश की जमानत जब्त हो गई जबकि आदमपुर में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
वर्ष 2011 में हिसार लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस की हार के बाद फूलचंद मुलाना ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद कांग्रेस पार्टी ने फूलचंद मुलाना को बदलने या सेवाओं को लगातार जारी रखने संबंधी कोई भी निर्णय लेने के लिए प्रस्ताव पारित करके यूपीए अध्यक्षा सोनिया गांधी को अधिकार सौंप दिए थे।
उसके बाद से आजतक सोनिया गांधी द्वारा इस मामले में कोई फैसला नहीं लिया था। अलबत्ता मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक विरोधी केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा, बीरेंद्र सिंह डूमरखां व अन्य नेता आए दिन मुलाना को बदलने के शिगूफे जरूर छोड़ते रहे हैं। इस उठापटक के चलते मुलाना को इस्तीफा देने के बाद चार बार एक्सटेंशन दी गई थी।
कांग्रेस के भीतर तथा बाहर फूलचंद मुलाना पर खुलेआम मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का समर्थन करने तथा पार्टी में गुटबाजी को हवा देने के आरोप लगते रहे हैं। बीरेंद्र सिंह डूमरखां जैसे वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की बैठकों के दौरान खुलेआम मंच पर मुलाना पर पार्टी में गुटबाजी को हवा देने का आरोप लगा चुके हैं।
यही नहीं पिछले साल अक्तूबर माह के दौरान फूलचंद मुलाना ने पार्टी की गुटबाजी को खत्म करने के उद्देश्य से हरियाणा के विभिन्न जिलों में पार्टी की सह-प्रभारी आशा कुमारी के साथ दौरे शुरू किए थे। महज पांच दौरों के बाद मुलाना का विरोध शुरू हो गया और उन्होंने अपने दौरे बीच में ही छोड़ दिए।
अंतिम बार दिसंबर माह के दौरान फूलचंद मुलाना को बदले जाने की चर्चा हुई। बीती 17 दिसंबर को फूलचंद मुलाना के स्थान पर सिरसा के सांसद अशोक तंवर को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपने की बात सामने आई। हालांकि मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का खेमा कांग्रेस अध्यक्ष की कमान गीता भुक्कल को देना चाहता था। करीब तीन दिन की उठापटक के बाद मामला शांत हो गया और फूलचंद मुलाना की अध्यक्षता में 28 दिसंबर को कांग्रेस का स्थापना दिवस समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें मुख्यमंत्री ने मुलाना की पीठ थपथपाई थी। उसके बाद से मुलाना को बदले जाने की अटकलें पूरी तरह से शांत हो चुकी थी। मुलाना को बदले जाने की चर्चाओं को लेकर माहौल जब शांत हुआ तो कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें झटका दे दिया।