चंडीगढ़ - हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने आज ‘मुख्यमंत्री शिक्षा-दीक्षा योजना’ का शुभारम्भ किया जिसके तहत सरकारी स्कूलों के बच्चें खेल खेल में पढेंगे व सिखेंगे और इस प्रकार प्रदेश में शिक्षा के स्तर में गुणात्मक बदलाव लाया जाएगा।
हुड्डा ने इस नई योजना की शुरूआत गुडग़ांव जिला के गांव भोड़ाकला स्थित ओम शांति रिट्रीट सैन्टर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में दीप प्रज्जवलित करके की। उन्होंने इस मौके पर योजना के फेसबुक पेज की भी शुरूआत की, जिस पर अध्यापक अपनी श्रेष्ठ अध्यापन पद्धतियों और तकनीकों को सांझा कर सकते हैं। हुड्डा ने कक्षा तत्परता कार्यक्रम के मॉड्यूल का विमोचन भी किया, जिसके माध्यम से सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के अभिभावक को शैक्षणिक वर्ष के दौरान करवाई जाने वाली गतिविधियों की जानकारी मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस समारोह में कक्षा तत्परता कार्यक्रम 2013 में सराहनीय कार्य करने वाले स्कूल प्रमुखों तथा शिक्षकों व सहयोग देने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। समारोह में प्रदेश भर से 730 विद्यालय प्रमुखों तथा शिक्षकों व 15 संस्थाओं को सम्मानित किया गया। समारोह में प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में चल रही शिक्षा की गतिविधियों पर आधारित डॉक्यूमैंट्री भी दिखाई गई।
इस मौके पर संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कक्षा तत्परता कार्यक्रम 2013 के विजेताओं को बधाई दी और कहा कि तीसरी, पांचवीं तथा आठवीं कक्षाओं की होने वाली राज्य स्तरीय परीक्षा में प्रत्येक राजकीय स्कूल में जो बच्चे प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करेंगे, उन्हें भी सम्मानित किया जाएगा। हुड्डा ने कहा कि गत वर्ष टोहाना में 24 मार्च को प्रवेश उत्सव (दाखिलों का उत्सव) पर भी उन्होंने कक्षा तत्परता कार्यक्रम का शुभारम्भ किया था। प्रवेश उत्सव से इस क्षेत्र के सभी विद्यार्थियों को एक दिन में दाखिला दिया गया। इससे सरकारी स्कूलों में बच्चों का रूझान बढ़ा और ड्रॉप आऊट दर में कमी आई है। ये दोनों ही कार्यक्रम बहुत ही सफल रहे। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी पढ़ाई में अच्छे नहीं हैं उनके लिए राज्य सरकार ने स्पैट आरम्भ किया है। ये गतिविधियां विद्यार्थियों में रूचि सृजित करती हैं कि उन्हें स्कूल में जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राजकीय स्कूलों में दी जा रही शिक्षा में गुणात्मक बदलाव लाने के लिए मुख्यमंत्री शिक्षा-दीक्षा योजना लागू की है। ऐसे गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों की ऑल राऊंड प्रसनैलिटी डवलपमैंट अर्थात चहुमुंखी व्यक्तित्व विकास हो, इस उद्देश्य को लेकर यह योजना प्रदेशभर में लागू की गई है, ताकि भविष्य में ये बच्चे ऐसे समाज का निर्माण कर सकें, जिससे देश व प्रदेश का दुनिया में नाम हो।
उन्होंने कहा कि शिक्षक ही एक अच्छे समाज का निर्माण कर सकता है और बच्चों में संवेदनशीलता पैदा करने में भी शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। हुड्डा ने कहा कि बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, उन्हें किस तरह ढालना है, यह शिक्षक का दायित्व होता है और उसमें यदि अभिभावक भी सहयोग दें तो और भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्कूलों के मुखिया गांवों में ऐसा माहौल पैदा करें कि बच्चों के अभिवावक भी प्रेरित होकर उनकी पढ़ाई में रूचि लेना आरम्भ कर दें। इसके साथ हुड्डा ने यह भी कहा कि दुनिया में विकास हर जगह हो रहा है, कहीं अधिक तो कहीं कम, लेकिन वही देश व प्रदेश भविष्य में आगे जाएगा, जो शिक्षा की दौड़ में आगे रहेगा।
हुड्डा ने कहा कि क्लास रैडीनेस प्रोग्राम बच्चों के लिए बहुत उपयोगी है। शुरू के दो महीने, जब बच्चा अगली कक्षा में आता है तो उसे खेल-खेल में शिक्षा देना अच्छा प्रयास है। उन्होंने कहा कि बाल मित्रवत और बाल केन्द्रित वातावरण में बच्चों को अगले पाठ्यक्रम के साथ तालमेल बैठाने में आसानी रहती है, वहीं अध्यापक भी बच्चों की प्रतिभा को समझ पाते हैं।
इससे पूर्व, हरियाणा की शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने कहा कि मुख्यमंत्री हुड्डा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने पर जोर दिया और उसके बाद अब स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ गुणात्मक शिक्षा देने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में दसवीं के बाद पहले केवल आट्र्स संकाय की ही पढ़ाई होती थी, लेकिन अब उसके साथ कॉमर्स, मैडीकल तथा नॉन मैडीकल की पढ़ाई भी शुरू की जाएगी, ताकि इन विषयों को पढऩे के इच्छुक विद्यार्थी इससे वंचित ना रहें। उन्होंने कहा कि हरियाणा में देश में सबसे पहले शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया गया और उसके तहत एक ही दिन में पूरे प्रदेश में स्कूल मैनेजमैंट कमेटियां गठित की गई। पिछले वर्ष कक्षा तत्परता कार्यक्रम की शुरूआत भी गई, ताकि बच्चों का ज्ञान केवल कागजी ज्ञान ना रहे और उन्हें बैंक तथा अन्य कार्यालयों में ले जाकर प्रैक्टिकल नॉलेज ग्रहण करवाई गई। इससे बच्चों का बहुत अच्छा इंटरैक्शन कार्यक्रम हुआ। बच्चों के मन से डर निकालना है, जिसमें हम काफी हद तक कामयाब रहे हैं।
शिक्षा विभाग की वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव सुरीना राजन ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि पिछले वर्ष 22 मार्च से 22 मई तक 6 सप्ताह का कक्षा तत्परता कार्यक्रम चलाया गया, जो गतिविधि आधारित सीखने की प्रक्रिया को मूर्त रूप देना था। यह कार्यक्रम केवल 6 सप्ताह तक ही सीमित ना रहे, इसके लिए इस बार कक्षा तत्परता कार्यक्रम का मॉड्यूल बनाया गया है, जिससे कि बच्चों के अभिभावकों को भी पता चल सके कि बच्चों को साल भर में स्कूल में कब-कब क्या-क्या करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम को शिक्षकों के कार्य के आंकलन, एसीआर तथा सीखने व सिखाने की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। साथ में श्रीमती राजन ने यह भी कहा कि जिस प्रकार खाद पौधे को हरा-भरा बनाती है, जिसके फलस्वरूप पौधे पर सुंदर फूल आते हैं और खाद की भूमिका का किसी को पता नहीं चलता, उसी प्रकार एक शिक्षक भी बच्चे को खाद की तरह पोषित करता है।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल, शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव सुरीना राजन, प्राथमिक शिक्षा विभाग के निदेशक डी सुरेश, विद्यालय शिक्षा विभाग के निदेशक चन्द्रशेखर, सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक पंकज अग्रवाल, गुडग़ांव के उपायुक्त शेखर विद्यार्थी, पुलिस आयुक्त आलोक मित्तल, नगर निगम आयुक्त डा. प्रवीण कुमार, एससीईआरटी की निदेशक स्नेहलता अहलावत, पूर्व विधायक रामबीर, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता जितेन्द्र भारद्वाज, कांग्रेसी नेता डा. कुलदीप वत्स, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डा. के सी भारद्वाज, ओम शांति रिट्रीट सैंटर के ब्रह्मकुमार भाई ब्रजमोहन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।