चंडीगढ़, ब्यूरो। पानीपत में एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को थप्पड़ मारने की घटना सोमवार को दिनभर सचिवालय में चर्चा का विषय बनी रही। अधिकारियों तथा कर्मचारियों के अलावा हरियाणा में दूर-दराज से अपने कामों के लिए यहां आने वाले अधिकतर लोग आज इसी घटना की चर्चा करते रहे। चुनावों के समय पर होने वाली इस तरह की घटना हरियाणा में पहली बार नहीं हुई है।
जनता द्वारा चुनावों के समय पर दिए जाने वाले परोक्ष संकेतों को नेता अक्सर समझने में मात खा जाते हैं। रविवार को पानीपत में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ हुई बदसलूकी की घटना पहली बार नहीं हुई है। इस घटना से महज दो दिन पहले सिरसा के सांसद अशोक तंवर को यात्रा के दौरान काले झंडे दिखाकर बदसलूकी की गई थी। जिसके चलते उन्हें अपनी यात्रा बीच में ही छोडऩी पड़ गई थी।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ भी यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले वर्ष 2010 में हिसार रैली के दौरान हुड्डा पर जूता उछाला गया था, जो उन्हें नहीं लगा। इससे पहले महेंद्रगढ़ में भी हुड्डा पर हमले का प्रयास किया गया था। इन घटनाओं से कुछ दिन पहले अंबाला के विधायक विनोद शर्मा जब हरियाणा में जनजागरण यात्रा निकाल रहे थे तो राई में एक युवक मंच पर चढ़ गया था। जिसने उनके गिरेबान में हाथ डालने का प्रयास किया था। उक्त युवक ने भी शर्मा के समक्ष आरोप लगाया था कि उसने सरकारी नौकरी के लिए पैसे दिए थे लेकिन न तो उसे नौकरी मिली और न ही पैसे वापस किए गए।
इसके कुछ समय बाद ही विनोद शर्मा को गोहाना में काले झंडे दिखाए गए थे। कुछ माह पहले कांग्रेस अध्यक्ष फूलचंद मुलाना ने जब प्रदेश स्तर पर कार्यकर्ताओं से संपर्क अभियान शुरू किया तो यमुनानगर में बदसलूकी के बाद उन्हें अपना अभियान बीच में छोडऩा पड़ गया। कुरूक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल के प्रथम कार्यकाल के दौरान उनपर भी जूता फैंकने का प्रयास किया गया था। उस समय जिंदल के समक्ष भी पैसे दिए जाने के बावजूद नौकरी न मिलने का आरोप लगाया गया था। आश्चर्यजनक बात यह है कि आजतक हरियाणा में हुई इन घटनाओं में लोगों ने नौकरी के बदले पैसे लेने के आरोप तो लगाए हैं लेकिन किसी ने खुलकर यह नहीं बताया कि उसने किसके माध्यम से, किसके लिए और कितने पैसे दिए थे।
दिनभर ब्लागरों में छिड़ा रहा महाभारत
मुख्यमंत्री पर रविवार को थप्पड़ मारने की घटना को लेकर आज दिनभर सोशल साइटों और ब्लागरों पर महाभारत छिड़ा रहा। कई लोगों को बड़े-बड़े लेख भी लिख डाले। सोशल साइटों पर कुछ ऐसी हुई टिप्पणियां।
फेसबुक टिप्पणी - जहां रहते थे वहां के मुखिया को थप्पड़ मार दिया अब सुरक्षित स्थान तलाश रहे हैं।
महिलाओं की सुरक्षा बाद की बात है अब तो आदमियों पर आन पड़ी है।
ये गूंज कुछ पुरानी है
क्या कहते हैं ब्लागर -
ई तो साला होना ए था
देर आयद, कम आयद
सीक्रिट ओपन हो गया