चंडीगढ़़, ब्यूरो। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंद्र सिंह हुड्डा और पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इसी विभाग के निर्देशक राजीव रंजन को पर्यावरण विभाग में हुई अनिमिताओं के मामले में जांच कर अपनी रिर्पोट देने के लिए कहा था, परन्तु अब डेढ़ वर्ष बाद संबंधित अधिकारियों का कहना है कि उन्हें ऐसा कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ। ऐसे में जांच कर रिपोर्ट देने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। इससे महज अंदाजा लगाया जा सकता है कि संबंधित अधिकारियों के लिए मुख्यमंत्री के आदेश क्या मायने रखते हैं?
आरटीआई कार्यकत्र्ता डा. राजिन्द्र कुमार सिंगला ने आरटीआई एक्ट के तहत प्राप्त दस्तावेजो से अगस्त, 2012 में खुलासा किया था कि हरियाणा के पर्यावरण विभाग में न केवल की गई नियुक्तियों व पदोन्नतियों में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं, बल्कि सूचना के अधिकार कानून के तहत दिए गए दस्तावेजों में भी हेर-फेर की गई है। यह मामला मीडिया में आने के बाद मुख्यमंत्री भूपिंद्र सिंह हुड्डा ने 23 अगस्त, 2012 को निर्देशक राजीव रंजन को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद 7 सितंबर, 2012 को पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने भी निर्देशक को जांच कर रिपोर्ट करने के लिए लिखित आदेश दिए थे। निर्देशक राजीव रंजन ने भी उक्त मामले में आश्वासन दिया था कि उन्होंने इस मामले की जांच के लिए एक पैनल का गठन कर दिया है।
डेढ़ वर्ष बाद जब उक्त मामले में कोई कार्यवाई नहीं हुई तो डॉ.सिंगला द्वारा 2 दिसंबर, 2013 को दोबारा आरटीआई आवेदन दायर कर जांच की प्रगति रिपोर्ट जानने का प्रयास किया गया। निर्देशक के अधीनस्थ कार्यरत जन सूचना अधिकारी राधे श्याम शर्मा, जोकि स्वंय इस घपले में संलिप्त है, ने सूचना अधिकार के तहत बताया कि उनके विभाग को अभी तक मुख्यमंत्री का ऐसा कोई आदेश ही प्राप्त नहीं हुआ। जबकि दूसरी ओर डॉ. सिंगला का दावा है कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 13 सितंबर, 2012 को ही अतिरिक्त मुख्य सचिव के आदेश संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखे गए थे।