चंडीगढ़, ब्यूरो। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कलायत उप-तहसील को कैथल जिले में एक तहसील के रूप में अपग्रेड करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। इस तहसील को उप मण्डल बनाने की सम्भावनाओं की जांच करने का भी निर्णय लिया गया।
तहसील कलायत में कलायत तथा मटौर दो कानूनगो सर्कल, 19 पटवार सर्कल, पुलिस स्टेशन कलायत, खण्ड कलायत, उप-खजाना कलायत पहले से ही वर्तमान उप-तहसील में विद्यमान हैं। कैथल जिला मुख्यालय से तहसील कलायत 25 किलोमीटर की दूरी पर है।
बैठक में मोती लाल नेहरू खेल विद्यालय, राई में विश्वस्तरीय कुश्ती एकेडमी स्थापित करने के लिये पांच एकड़ भूमि सुशील कुमार फाऊडेंशन को आबंटित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, मुक्केबाज विजेन्द्र सिंह को बॉक्सिंग अकादमी खोलने के लिए तीन एकड़ भूमि देने को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
यहां यह उल्लेखनीय है कि मंत्रिमण्डल ने 18 दिसम्बर को हुई अपनी बैठक में पदमश्री एवं चैम्पियन सुशील कुमार की उपलब्धियों के मद्देनजर आठ एकड़ भूमि सुशील कुमार फाऊडेंशन को कुश्ती अकादमी के लिये आबंटित करने का निर्णय लिया था, परन्तु सुशील कुमार फाऊडेंशन से अनुरोध प्राप्त हुआ कि पांच एकड़ जमीन उनके लिये पर्याप्त होगी। भूमि की पट्टा दर 35,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष होगी और पहली बार पट्टा अवधि 33 वर्षों के लिये होगी। इसके अलावा, कुश्ती एकेडमी में दाखिले के लिये हरियाणा मूल के आदिवासियों के लिये 50 प्रतिशत सीटे आरक्षित होंगी।
हरियाणा में अब गांव के लाल डोरे और फिरनी में आने वाले क्षेत्रों को आबादी देह माना जाएगा क्योंकि इस संबंध में पंजाब अनुसूचित सडक़ तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध अधिनियम,1963 की धारा 22 (क) तथा पंजाब नई राजधानी (परिधि) नियंत्रण अधिनियम,1952 में संशोधन को मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई। संशोधित विधेयक के प्रारूप को विधानसभा के आगामी बजट सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।
मंत्रिमंडल की बैठक में दोहलीदारों, बुटिमारों, भौंडेदारों तथा मुकररीदारों को 31 जुलाई, 2014 को या इससे पूर्व आवेदन प्रेषित करने का अवसर प्रदान करने के लिए हरियाणा दोहलीदार, बुटिमार, भौंडेदार तथा मुकररीदार (मालिकाना हक देने बारे) नियम, 2011 में किए गए संशोधनों को घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की गई ताकि अधिक से अधिक पात्र किसान इस कृषि सुधार अधिनियम का लाभ ले सकें।
इस संशोधन के फलस्वरूप इस नियम में यह परंतु परिस्थापित किया गया है ‘दोहलीदार,बुटिमार, भौंडेदार तथा मुकररीदार या इनके हित उत्तराधिकारी जिनकी अधिनियम के प्रारम्भ होने की तिथि को 20 वर्ष की अवधि पूर्ण हो गई है, मालिकाना अधिकार निहित करने के लिए 31 जुलाई, 2014 को या इससे पूर्व सम्बन्धित कलैक्टर को आवेदन कर सकते हैं।’