चण्डीगढ़, 24 जनवरी - हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में एच1एन1 स्वाईन फ्लू को फैलने से रोकने और इसके पॉजिटिव मामलों का उचित उपचार करने के लिये प्रभावी कदम उठाने के साथ-साथ इस संबंध में दिशा निर्देश भी जारी किये हैं। चालू वर्ष के दौरान प्रदेश में अब तक स्वाईन फ्लू के 31 मामले प्रकाश में आये हैं।
विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि जिला करनाल में स्वाईन फ्लू के सबसे अधिक नौ मामले प्रकाश में आये हैं जबकि कुरूक्षेत्र एवं फतेहाबाद में चार-चार, हिसार एवं सिरसा में तीन-तीन, यमुनानगर, कैथल एवं पंचकूला में दो-दो और जिला रोहतक एवं अम्बाला में एक-एक मामला प्रकाश में आया है। उन्होंने कहा कि इनमें से 17 मरीजों को अस्पतालों में दाखिल करवाया गया और तीन को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है जबकि जिला रोहतक एवं फतेहाबाद में एक-एक मरीज को घर में अलग से रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कल तक प्रदेश के पांच जिलों से नौ लोगों की मृत्यु होने की रिपोर्ट है। इनमें से कुरूक्षेत्र में तीन, करनाल एवं सिरसा में दो-दो और हिसार एवं गुड़गांव में एक-एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है।
उन्होंने कहा कि सिविल सर्जन को अस्पतालों में ऐसे मरीजों के लिए अलग वार्ड या कक्ष बनाने तथा यह सुनिश्चित करने के दिशा निर्देश दिये गये हैं कि इन कक्षों में चादरें, रक्तचाप जांचने की मशीनें तथा थरमोमीटर अलग से उपलब्ध करवाये जायें। इसके अतिरिक्त, अलग से बनाये गये इन कक्षों के लिये समर्पित फीजीशियन, नर्से एवं अर्ध-चिकित्सीय अमला भी उपलब्ध करवाया जाये। इन वार्डाें में बडे़-बडे़ ऑक्सीजन सिलेंडर, प्लस ऑक्सीमीटर तथा पोर्टेबल एक्सरे मशीनें भी हमेशा उपलब्ध रहें।
सभी सिविल सर्जनों को ऐसे निकटतम सरकारी या निजी स्वास्थ्य संस्थान की पहचान करने के भी निर्देश दिये गये हैं जिसमें वैंटीलेटर की सुविधाएं हो। रोहतक, अग्रोहा, सोनीपत एवं गुड़गांव में वैंटीलेटर सुविधाएं उपलब्ध हैं, इसलिये सिविल सर्जनों को इन शहरों के निजी स्वास्थ्य संस्थानों के साथ भी सम्पर्क बनाये रखने के निर्देश दिये गये हैं ताकि यदि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों से मरीजों को वहां भेजा जाए तो वे उनके लिये वैंटीलेटर की सुविधाएं उपलब्ध करवा सकें। सभी जिला इकाइयों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण किट एवं वायरस ट्रांस्फर मीडियम किट, एन 95 मास्क, ट्रिप्ल लेयर मास्क तथा ओसेलटेमीवीर, ऐंटीबाइओटिक्स एवं अन्य दवाइयां उपलब्ध करवाई गई हैं।
उन्होंने कहा कि रेपिड रिस्पांस टीम को भी एच1एन1 के पॉजिटिव मामले का पता लगाने के निर्देश जारी किये गये हैं। उन्हें निर्देश दिये गये हैं कि यदि स्वाईन फ्लू का कोई संदिग्ध या पॉजीटिव मामला हो तो उसकी सूचना तुरंत दूरभाष से राज्य सर्वेक्षण इकाई को दी जाए। उन्हें तुरंत उस क्षेत्र विशेष का दौरा तथा घर-घर जाकर सर्वेक्षण करना चाहिए। सर्वेक्षण के दौरान यदि किसी संदिग्ध मामले का पता चले तो उन्हें गले एवं नाक के नमूने लेने चाहिए तथा टॉमीफ्लू की दवा देनी चाहिए। स्वाईन फ्लू की इनक्यूबेशन (उष्मायन)अवधि सात दिन है इसलिए मरीज एवं उससे मिलने आने वालों पर स्वाईन फ्लू के इनक्यूबेशन के समय से दुगने समय तक नजर रखी जानी चाहिए। इसलिये, अंतिम प्रकाशित मामले के 14 दिनों तक अनुवर्ती कार्यवाही की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उन्हें एच1एन1 मरीजों के नमूनों को पुष्टि के लिये राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र, दिल्ली या डा0 लाल पाथ लैब, गुड़गांव या पीजीआईएमईआर ,चण्डीगढ़ भेजने को भी कहा गया है। उन्हें अपने संबंधित जिलों में लोगों को इस बारे जानकारी देने एवं शिक्षित करने पर बल देने को भी कहा गया है। इसके अतिरिक्त, उन्हें रोजाना रिपोर्टिंग विश्लेषण करने तथा आवश्यकता अनुसार उचित कार्यवाही करने का भी परामर्श दिया गया है।
उन्होंने कहा कि एच1एन1 के लक्षणों से पीडि़त लोगों के उपचार के लिये केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है।