चंडीगढ - हरियाणा के जिला फतेहाबाद के गोरखपुर में लगने वाला परमाणु बिजली संयंत्र इलाके में विकास के मामले में मील का पत्थर साबित होगा और प्रदेश में दशको तक बिजली की समस्या का निदान हो जाएगा।
यह बात हरियाणा के मुख्यमंत्री चौधरी भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के राजनैतिक सलाहाकार प्रोफेसर वीरेन्द्र सिंह ने आज गांव गोरखपुर में प्रधानमंत्री के दौरा कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने उपरान्त कही। इस अवसर पर सिरसा लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. अशोक तंवर, लोक निर्माण विभाग के मुख्य संसदीय सचिव प्रह्लाद सिंह गिल्लाखेड़ा, जिला उपायुक्त डॉ. साकेत कुमार, पुलिस अधीक्षक शिव चरण अत्री, अतिरिक्त उपायुक्त राज नारायण कौशिक, उपमंडलाधीश बलजीत सिंह व अन्य अधिकारी मौजूद थे।
उन्होंने सभा स्थल, शिलान्यास स्थल व अन्य स्थलों का दौरा किया और किए गए प्रबंधों की प्रशासन से विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि गांव गोरखपुर में 23502 करोड़ रुपये की लागत से परमाणु बिजली संयंत्र लगाया जाएगा जिससे इस इलाके की तस्वीर ही बदल जाएगी। जहां प्रदेश बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा वहीं इस इलाके में बड़े उद्योग धंधे लगेगे और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि बिजली विकास की धूरी है। आज तो आटा पीसने से लेकर दूध बिलोने तक के कार्य बिजली से हो रहे हैं इसलिए बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की सरकार ने पिछले आठ साल के कार्यकाल में 4 नये बिजली उत्पादन संयंत्र लगाए है। पांचवा संयंत्र गांव गोरखपुर में लगेगा जिससे 2800 मैगावाट बिजली पैदा होगी। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने भुटान की सरकार से पानी से बिजली पैदा करने के लिए मसौदे पर दो दौर की बातचीत हो चुकी है और जल्द ही हरियाणा सरकार पानी से 2 हजार मैगावॉट बिजली का उत्पादन शुरू करेगी।
प्रोफेसर वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि बिजली उत्पादन मुख्यत कोयला, पानी और परमाणु से हो सकती है। कोयले का भण्डार लगातार कम हो रहा है इसलिए परमाणु से ऊर्जा उत्पादन पर अधिक ध्यान दिया गया है। परमाणु ऊर्जा ने केवल सुरक्षित है बल्कि लंबे समय तक उपलब्ध होती है इसीलिए सरकार ने गोरखपुर में परमाणु बिजली संयंत्र लगाने के कार्य को गति देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के लगभग सभी देशों में परमाणु से बिजली पैदा की जा रही है। इसके साथ-साथ प्रदेश सरकार ने पांच देशों के सहयोग से जसौरखेड़ी में परमाणु पर शोध के लिए विश्वविद्यालय स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि कुछ राजनैतिक दल परमाणु संयंत्र का विरोध कर रहे हैं, जबकि इन्ही के शीर्ष नेताओं ने परमाणु बिजली संयंत्र लगाने के लिए अपने पत्र केंद्र सरकार को लिखे थे। उन्होंने कहा कि इन दलों का विकास से कोई लेना देना नहीं है, केवल विरोध ही इनका मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि एक तरफ तो ये दल बिजली की मांग के लिए हर रोज धरना प्रदर्शन करते हैं और दूसरी ओर बिजली उत्पादन के लिए लगाए जाने वाले संयंत्रों का विरोध करते हैं। इन राजनैतिक दलों की सोच परमाणु ऊर्जा के बारे में केवल जनता को भ्रमित करना है जबकि वे स्वयं जानते हैं कि परमाणु ऊर्जा सबसे सुरक्षित ऊर्जा है। अगर सरकार बिजली के ये चार संयंत्र न लगाती तो हरियाणा में बिजली के नाम पर केवल आसमानी बिजली ही देखने को मिलती।
प्रोफेसर वीरेन्द्र ने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दूल कलाम परमाणु ऊर्जा के बड़े समर्थक है। इसके साथ-साथ अनेक वैज्ञानिकों ने अपना सारा जीवन परमाणु ऊर्जा के कार्यक्रमों पर लगा दिया है, जब इन वैज्ञानिकों को परमाणु से कोई नुकसान नहीं हुआ तो आम आदमी को परमाणु से किस प्रकार नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि जसौरखेड़ी में बनने वाला विश्वविद्यालय संसद भवन से मात्र 30 किलोमीटर दूर है, अगर परमाणु से कोई खतरा होता तो सरकार यह विश्वविद्यालय नहीं बनाती।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के लिए यह गौरव की बात है कि बिजली उत्पादन का पांचवा संयंत्र गांव गोरखपुर में लगने जा रहा है। इससे जहां इलाके में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित होगी वहीं आर्थिक विकास को गति मिलेगी। बिजली की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी। प्रदेश बिजली के मामले में सरपल्स राज्य बन जाएगा। दशकों तक बिजली की समस्या खत्म हो जाएगी और आने वाली पीढिय़ों को भी इसका लाभ मिलेगा।