चंडीगढ़ - हरियाणा के राज्यपाल श्री जगन्नाथ पहाडिय़ा ने कहा कि वैश्य समाज को चाहिए कि वह निर्बल व कमजोर वर्गों का सहयोग करें और उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनायें।
श्री पहाडिय़ा नई दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय खण्डेलवाल वैश्य महासभा के शताब्दी समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि महासभा जनसेवा के कार्य में निरन्तर समर्पित रह कर एक स्वस्थ, खुशहाल और शिक्षित समाज बनाने में अपना उल्लेखनीय योगदान देती रहेगी। इस अवसर पर राज्यपाल ने विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य करने वाले वैश्य समुदाय की अनेक विभूतियों को भी सम्मानित किया, जिनमें हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डा0 के. के. खण्डेलवाल, दुबई के लक्ष्मीनारायण धामाणी, महासभा के स्वागताध्यक्ष विजेन्द्र खण्डेलवाल और महासभा के मंत्री राकेश रावत शामिल थे।
समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की ओर से प्राप्त संदेश पढ़ा गया, जिसमें संत सुन्दर दास भवन एवं धर्मशाला के लिये गुडग़ांव अथवा फरीदाबाद में करीब 2,000 वर्ग मीटर का भू-खण्ड रियायती दर पर उपलब्ध करवाने घोषण की। हुड्डा को मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में भाग लेना था, लेकिन खराब मौसम के चलते वे कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके।
श्री पहाडिय़ा ने कहा कि देश और समाज की सेवा करते हुए किसी भी संस्था के 100 वर्ष पूरे होना गौरव का विषय है। अखिल भारतीय खण्डेलवाल वैश्य महासभा भी 1913 में अपनी स्थापना से ही शिक्षा और समाज कल्याण के क्षेत्र में अनेक योजनायें तथा कार्यक्रम चला कर मानव सेवा के प्रति अपने कत्र्तव्य का निर्वहन कर रही हैं। इन प्रयासों से समाज के अंतिम व्यक्ति तक के जीवन को सरल व आनन्दमय बनाने का महान कार्य हो रहा है।
श्री पहाडिय़ा ने कहा कि सदियों से ही वैश्य समाज का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है। इस समाज ने महाराजा अग्रसेन के साथ ही संत सुन्दर दास, दानवीर सेठ भामाशाह, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, लाला लाजपत राय, मैथिली शरण गुप्त, डा0 राम मनोहर लोहिया आदि महान विभूतियां दी हैं। हर क्षेत्र में वैश्य समुदाय के लोगों की अग्रणी भूमिका देखने को मिलती है। मीडिया, साहित्यिक, विधि, न्याय व वित्त सहित सभी क्षेत्रों में वैश्य समुदाय के लोगों ने अपनी बुद्धिमता और योग्यता की छाप छोड़ी है।