चंडीगढ़ - हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी के निदेशक सुखचैन सिंह भंडारी ने बताया आज से 16 वर्ष पूर्व हरियाणा सरकार की ओर से हरियाणा प्रांत में पंजाबी भाषा, साहित्य एवं सांस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी का गठन किया गया जिन्हें हरियाणा में स्थापित पंजाबी साहित्यकारों को आए वर्ष सम्मानित करने के लिए अकादमी के माध्यम से सरकार लाखों रुपये खर्च कर रही है, ताकि इस प्रांत में पंजाबी भाषा और साहित्यकारों को मान-सम्मान हासिल हो सके। इसी कड़ी में अकादमी द्वारा हरियाणा के भिन्न-भिन्न गाँवों, कस्बों, शहरों के स्कूलों व कालेजों में स्वयं जाकर बाल-विद्यार्थी कवि-दरबार व पंजाबी बोली, भ्रूण-हत्या, देशप्रेम और पर्यावरण से सम्बन्धित भाषण मुकाबले भी करवाये जा रहे हैं ताकि बड़े साहित्यकारों के साथ-साथ विद्यार्थी भी पंजाबी साहित्य को ग्रहण कर सकें। अकादमी ऐसे बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए नगद राशि और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित भी करती है।
इसी संदर्भ में आज कैथल (हरियाणा) जिले के गुहला कसबे के राजकीय सीनियर सकैंडरी स्कूल के प्रांगण में एक भव्य विद्यार्थी कवि-दरबार का आयोजन किया गया जिसमें लगभग डेढ़ दर्जन बच्चों ने भिन्न-भिन्न रंगों से ओत-प्रोत कविताएं मंच पर प्रस्तुत कीं, जिन्हें स्कूल के विद्यार्थियों और बाहर से आए हुए श्रोताओं ने बड़ा सराहा। इस अवसर पर हरियाणा के जाने माने पंजाबी कवियों कुलवंत चावला 'रफ़ीक, पूरण सिंह 'निराला, जोगिन्दर सिंह 'मुक्ता, लख करनालवी, डा. देविन्दर सिंह 'बीबीपुरिया, कश्मीर 'मौजी और सुखचैन सिंह भंडारी ने अपनी-अपनी कविताओं द्वारा मां बोली पंजाबी और देशप्रेम को नमन किया। इस अवसर पर अकादमी निदेशक सुखचैन सिंह भंडारी ने विद्यार्थियों को अपने संबोधन में कहा कि वह स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ अपने अध्यापकों और घर के बुज़ुर्गों के प्रति पूरे सम्मान की भावना ग्रहण करें और साथ ही अपने देश और समाज को नये आयाम प्रस्तुत करने में सहयोग दें। इससे वह सभ्य नागरिक बनकर अपना भी नाम रौशन करेंगे। अकादमी की ओर से सभी भागीदार बच्चों को नगद राशि एवं प्रमाण पत्र दिये गये।