चण्डीगढ़ - हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदूषण जांच केन्द्रों की स्थापना के लिए अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु हरियाणा मोटर वाहन नियम-1993 में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई।
यह संशोधन इसलिए आवश्यक हो गया था, क्योंकि इस समय संबंधित क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के सचिव की सिफारिश के आधार पर परिवहन आयुक्त द्वारा स्वीकृति प्रदान की जाती है। यह पाया गया कि यह एक लम्बी प्रक्रिया है और स्वीकृति प्राप्त करने में लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रक्रिया को सरल बनाकर और अधिक प्रदूषण जांच केन्द्र स्थापित करने की आवश्यकता है, जिसके तहत क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण द्वारा प्रदूषण जांच केन्द्रों की स्थापना के लिए स्वीकृति प्रदान करनी चाहिए ताकि इस प्रक्रिया को तेज किया जा सके।
इसके अतिरिक्त, संशोधन परिवहन आयुक्त द्वारा किसी अन्य अधिकारी को स्वीकृति प्रदान करने के लिए प्राधिकृत करने का प्रावधान भी करेगा। चूंकि, 3 मार्च, 2010 को जारी एक अधिसूचना के द्वारा राज्य परिवहन नियंत्रक को परिवहन आयुक्त नामित किया जा चुका है इसलिए ‘राज्य परिवहन नियंत्रक’ के स्थान पर ‘परिवहन आयुक्त’ शब्द प्रतिस्थापित किया जाएगा।
बैठक में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरणों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के संबंध में हरियाणा मोटर वाहन नियम- 1993 में संशोधन करने के परिवहन विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
नियमों में संशोधन विभिन्न अधिकारियों के लिए दुर्घटना दावों के निपटान, विशिष्ट ड्यूटियों के निर्धारण तथा घटनाक्रम के विषय में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया को सरल बनाएगा और दावा आवेदनों का तुरन्त निपटान करने में सहायक होगा।
संशोधन के अनुसार दावों के आवेदन में सभी दस्तावेज, जिन पर आवेदक अपने दावे के संदर्भ में विश्वास रखता है, आवेदक की पहचान के सबूत, जांच पुलिस अधिकारी एवं रजिस्ट्री प्राधिकरण की रिपोर्ट तथा चिकित्सा प्रमाण पत्र शामिल होंगे।
जांच पुलिस अधिकारी दुर्घटना स्थल के फोटो लेगा, स्थल योजना बनाएगा तथा दुर्घटना में संलिप्त वाहन के संबंध में बीमा पोलिसी के पूर्ण विवरण एकत्रित करेगा तथा दावा अधिकरण को अपनी सविस्तार रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। रजिस्ट्री प्राधिकारी और बीमा कंपनी निर्धारित प्रपत्र में दावा अधिकरण को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। दावा अधिकरण स्थल निरीक्षण के लिए तथा किसी ऐसे व्यक्ति, जो कि जांच के लिए जरूरी सूचना देने में सक्षम हो, की जांच करने के लिए दुर्घटना स्थल का दौरा कर सकता है। दावा अधिकरण किसी भी चिकित्सा अधिकारी को घायलों की जांच करने तथा दुर्घटना के परिणामस्वरूप हुई अक्षमता की डिग्री एवं हद का प्रमाण पत्र जारी करने हेतु निर्देश दे सकता है।
अव्यस्क के मामले में दावा अधिकरण दी गई मुआवजे की राशि को सावधिक जमाओं में तब तक निवेश करने के लिए आदेश दे सकता है, जब तक कि प्रभावित अव्यस्क व्यस्क नहीं हो जाता।
बैठक में हरियाणा मकैनिकल वाहन (टोल शुल्क) अधिनियम, 1996 की धारा 7 (2)के प्रावधानों में संशोधन करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
संशोधन अनुसार कोई भी व्यक्ति जो धारा 4 के अन्तर्गत पथकर की मांग, संग्रहण तथा रखने के लिये अधिकृत है, वह पुलों, सुरंगों, घाटों, अप्रोच सड़कों या नई सड़कों के भाग या बाई पासों सहित सड़क आधारभूत संरचना को यातायात की सुगम आवाजाही के लिये उचित तरीके से बनाये रखेगा।
मंत्रिमंडल ने हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम के भूमि अधिग्रहण के विरूद्घ 16 जुलाई, 2012 को मिनी सचिवालय, रेवाड़ी तथा 22 जुलाई, 2012 को जिला रेवाड़ी के गांव आसलवास में हुई हिंसा की जांच करने के लिए जांच आयोग नियुक्त किये जाने को अपनी घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की।
यहां यह उल्लेखनीय है कि सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री इकबाल सिंह को जांच आयोग नियुक्त किया है।