पंचकूला क्राइम ब्रांच ने की मामले की जांच
को-फाउंडर आमीन गोयल और सिद्धार्थ उनियाल समेत नौ जांच के घेरे में
फंड डायवर्जन, आपराधिक विश्वासघात और साजिश के आरोपों में स्टेट क्राइम ब्रांच की जांच
चंडीगढ़। चर्चित ऑनलाइन फिटनेस और रिहैबिलिटेशन प्लेटफॉर्म ग्रैनिमल्स एब्सोल्यूट फिटनेस प्राइवेट लिमिटेड का अंदरूनी विवाद अब आपराधिक जांच तक पहुंच गया है। शार्क टैंक इंडिया में करीब 100 करोड़ की वैल्यू बताए गए इस वेंचर से जुड़े मामले में हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच पंचकूला की जांच में कथित फंड डायवर्जन, आपराधिक विश्वासघात, धमकी और साजिश से जुड़े प्रथम दृष्टया अपराध सामने आए हैं। मामले में को-फाउंडर आमीन गोयल और सिद्धार्थ उनियाल समेत अन्य लोगों के खिलाफ आरोपों की जांच की गई है।
एडवोकेट विनायक बंसल ने आज यहां जारी जानकारी में बताया कि शिकायतकर्ता एवं को-फाउंडर रोचन कक्कड़ ने 14 जून 2025 को दी शिकायत में कहा कि ग्रैनिमल्स की शुरुआत 2021 में रोचन कक्कड़, सिद्धार्थ उनियाल और आमीन गोयल ने की थी और तीनों की कंपनी में 33.33 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का टर्नओवर करीब 9.47 करोड़ रुपये बताया गया है। रोचन कक्कड़ का आरोप है कि 2025 में फाउंडर्स के बीच विवाद के बाद उन पर अपने शेयर बेचने का दबाव बनाया गया। इनकार करने पर कथित तौर पर कंपनी के ईमेल, इंटरनल सिस्टम और कम्युनिकेशन तक उनकी पहुंच बंद कर दी गई।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि हीलपेन रिकवरी केयर प्राइवेट लिमिटेड नाम से नई कंपनी बनाकर ग्रैनिमल्स के ग्राहकों, कर्मचारियों और गोपनीय कारोबारी डेटा को शिफ्ट करने की साजिश रची गई। फर्जी इनवॉइस और थर्ड-पार्टी अकाउंट्स के जरिए कंपनी के फंड डायवर्ट करने के भी आरोप लगाए गए। मामला शुरुआत में साइबर क्राइम को भेजा गया था, लेकिन एनसीएलटी में विवाद लंबित होने और मामला सिविल प्रकृति का मानते हुए इसे बिना विस्तृत जांच के बंद कर दिया गया। इसके बाद धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत दायर अर्जी खारिज हुई, जिसके खिलाफ रिवीजन याचिका सेशंस कोर्ट में लंबित है। बाद में अधिकारियों के समक्ष अलग से आवेदन दिया गया, जिसके बाद मामला हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच को जांच के लिए ट्रांसफर किया गया। जांच के दौरान शिकायतकर्ता रोचन कक्कड़ और ग्रैनिमल्स की पूर्व एचआर मैनेजर एवं फाइनेंस हेड निधि शर्मा के बयान दर्ज किए गए। व्हाट्सऐप रिकॉर्ड, कंपनी ईमेल, चैट, पीपीटी वर्कशीट समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज भी जांच में पेश किए गए।
कानूनी राय में प्रथम दृष्टया अपराध
जांच सामग्री के आधार पर डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी की कानूनी राय में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 351(2) और 61(2) के तहत आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश के अपराध प्रथम दृष्टया बनते पाए गए। जांच में यह भी कहा गया कि एनसीएलटी में सिविल कार्यवाही लंबित होने मात्र से आपराधिक कार्रवाई पर रोक नहीं लगती, यदि तथ्यों से स्वतंत्र रूप से आपराधिक अपराध सामने आते हों। मामले में को-फाउंडर सिद्धार्थ उनियाल, आमीन गोयल, सीए जयपाल शर्मा, कृष्ण वर्मा, संजीव कुमार गर्ग, तनवीश इनानी, करण शर्मा, विकास पंवार और हर्षित द्विवेदी के नाम आरोपों से जुड़े हैं। गहन जांच के बाद स्टेट क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश कर दी है। मामले में लगाए गए आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाना शेष है।