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बाल समागम में बच्चों ने प्रस्तुत किए, संस्कार, शिक्षा एवं प्रभु भक्ति के प्रेरणादायी संदेश

Updated on Tuesday, June 30, 2026 10:01 AM IST

चंडीगढ़, 28 जून। संत निरंकारी सत्संग भवन, सेक्टर-30, चंडीगढ़ में आज एक भव्य बाल समागम का आयोजन किया गया, जिसमें बाल संतों ने भजन, गीत, नाटिका एवं अन्य प्रेरणादायक प्रस्तुतियों के माध्यम से सत्संग, शिक्षा, सेवा, सिमरन एवं उत्तम संस्कारों का प्रभावशाली संदेश दिया। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रोताओं का मनमोह लिया तथा सभी ने उनकी प्रतिभा और आध्यात्मिक सोच की सराहना की।

 

इस अवसर पर ज्ञान प्रचारक महात्मा श्री पवन कुमार जी मुखी एरिया 40 ने बच्चों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि आज बच्चों ने जिन उच्च जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक शिक्षाओं को मंच के माध्यम से प्रस्तुत किया है, वे केवल कार्यक्रम तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन, व्यवहार और कर्मों में भी उतरें। उन्होंने निरंकार प्रभु से प्रार्थना करते हुए कहा कि सभी को ऐसा आशीर्वाद प्राप्त हो कि गुरु की शिक्षाओं को जीवन में अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति एक आदर्श मानव एवं भक्तिमय जीवन जी सके।

 

उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस समर्पण और उत्साह के साथ उन्होंने इस कार्यक्रम की प्रस्तुति की है, उसी प्रकार उन्हें निरंतर सत्संग से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्संग केवल आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम ही नहीं, बल्कि श्रेष्ठ संस्कारों और अनुशासित जीवन शैली की आधारशिला भी है। उन्होंने बच्चों से नियमित रूप से सत्संग में आने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि प्रतिदिन आना संभव न हो तो सप्ताह में निर्धारित सत्संगों तथा विशेष रूप से रविवार के सत्संग में अवश्य सहभागिता करें।


श्री पवन कुमार जी ने कहा कि निरंकारी बच्चों की पहचान उनके उत्तम संस्कार, अनुशासन, माता-पिता एवं शिक्षकों के प्रति सम्मान तथा पढ़ाई के प्रति समर्पण से होनी चाहिए। उन्होंने प्रेरित किया कि विद्यालय में होने वाली पेरेंट्स-टीचर मीटिंग में शिक्षकों की ओर से प्रत्येक बच्चे के लिए यह प्रशंसा सुनने को मिले कि ये बच्चे अनुशासित, आज्ञाकारी, परिश्रमी एवं उत्कृष्ट आचरण वाले हैं। यही सत्गुरु की शिक्षा का वास्तविक प्रचार है, जो बच्चों के चरित्र और व्यवहार के माध्यम से समाज तक पहुँचता है।

 


उन्होंने बच्चों को शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री के. आर. नारायणन के संघर्षपूर्ण विद्यार्थी जीवन का प्रेरक प्रसंग सुनाया और कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद निरंतर परिश्रम, गुरुजनों का सम्मान और शिक्षा के प्रति लगन ही व्यक्ति को महान बनाती है। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे सत्संग, सेवा, सिमरन, श्रेष्ठ शिक्षा और अच्छे संस्कारों को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाकर समाज एवं राष्ट्र के आदर्श नागरिक बनने का संकल्प लें।

 

कार्यक्रम का समापन निरंकार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इस प्रार्थना के साथ हुआ कि सभी बच्चों का जीवन आध्यात्मिक मूल्यों, उत्कृष्ट शिक्षा, सेवा भावना एवं मानवीय गुणों से आलोकित हो तथा वे भविष्य में समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनें।

 

इससे पूर्व यहां के संयोजक श्री नवनीत पाठक जी ने इस अवसर पर उपस्थित श्री पवन कुमार जी, और श्री ओ.पी निरंकारी जोनल इंचार्ज व सभी श्रोताओं और बाल संगत के इन्चार्ज तथा सेवादल अधिकारियों का धन्यवाद किया ।

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