चंडीगढ़ - हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने आज अपने विश्वविद्यालयों के माडल को बदलने और उनकी शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सकल नामांकन अनुपात (ग्रोस इनरोलमेंट रेशो) और बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की सहायता भी मांगी।
मुख्यमंत्री नई दिल्ली में आयोजित शिक्षा सम्मेलन में ‘सार्वजनिक शिक्षा देने में निजी भागीदारिता की मांग’ विषय पर बोल रहे थे।
हुड्डा ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों के उत्साहवर्धक परिणाम मिल रहे हैं क्योंकि प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) समस्त भारत के औसत अनुपात 19.40 प्रतिशत की तुलना में 20.13 प्रतिशत पर पहुंच गया है। वर्ष 2020 तक 18-23 वर्ष के आयु समूह के युवाओं का 30 प्रतिशत का सकल नामांकन अनुपात के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें निजी क्षेत्र को शामिल करने की आवश्यकता है क्योंकि उच्चतर शिक्षा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्रस्तावित सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। इस उद्देश्य के लिए हरियाणा के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की वर्तमान सीटों की क्षमता 10 लाख विद्यार्थियों (सकल नामांकन अनुपात 20 प्रतिशत )के अनुसार है। यदि हमें सकल नामांकन अनुपात का 30 प्रतिशत का आंकड़ा लाना है तो हमें महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में 6 लाख और सीटें सृजित करनी पडे़ंगी। उन्होंने बताया कि हमें बड़े पैमाने पर निजी क्षेत्र की भागीदारी की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार हरियाणा को एक अन्तर्राष्ट्रीय मानक का शिक्षा हब बनाने के लिए वचनबद्घ है। प्रदेश में शिक्षा के आधारभूत अवसंरचना में सुधार के प्रयास किए जा रहे है तथा शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में राजीव गांधी एजूकेशन सिटी उच्चतर शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीय हब होगा और विदेशों से विद्यार्थी अध्ययन करने के लिए हरियाणा में आएंगे।
हुड्डा ने कहा कि मानव संसाधन विकास राष्ट्र निर्माण के कार्य में एक महत्वपूर्ण घटक है। इस दिशा में सार्वजनिक क्षेत्र ठोस प्रयास कर रहा है परन्तु बदलते वैश्विक परिदृश्य के साथ शिक्षा के मानक में और सुधार करने की आवश्यकता है। इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारिता की आवश्यकता है। इसके साथ ही हरियाणा सरकार ने निजी क्षेत्र की सहायता लेने के लिए एक नीतिगत निर्णय लिया है।
हुड्डा ने कहा कि पिछले आठ वर्षों के दौरान प्रदेश में विश्वविद्यालयों की संख्या 8 से बढ़कर 36 हो गई है। आज प्रदेश में 662 तकनीकी संस्थानों के अतिरिक्त 701 सरकारी और निजी महाविद्यालय है। इस दौरान प्रदेश में 35 नए राजकीय महाविद्यालय और 501 नए तकनीकी संस्थान खोले गए है। प्रदेश के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में लगभग 12 लाख विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विश्व स्तरीय शिक्षा केन्द्र के रूप में राजीव गांधी एजुकेशन सिटी स्थापित की जा रही है जब यह पूरी तरह से विकसित हो जाएगी तो इसमें 1.5 लाख छात्र एक साथ पढ़ाई कर सकेंगे। यह एजुकेशन सिटी उच्चतर शिक्षा और नैनो टैक्नोलोजी, बॉयो टैक्नोलोजी और जैनिटिक्स जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान का एक प्रमुख केन्द्र बनेगी। यहां पर स्थापित किये जा रहे प्रसिद्घ शैक्षणिक संस्थान ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की तर्ज होंगे।
हुड्डा ने कहा कि 21वीं सदी में नए उभरते भारत को देखने का सपना हमारे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी का था और उन्होने अपने युवाओं पर केन्द्रित नई प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया। हरियाणा में हम उस महान दूरदर्शी पूर्व प्रधानमंत्री के सपनों को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं।
हुड्डा ने कहा कि प्रदेश में विश्वविद्यालयों के तन्त्र का विस्तार करने का प्रयास किया गया है। महेन्द्रगढ़ में केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है। जिला रेवाड़ी के मीरपुर में महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केन्द्र को विश्वविद्यालय के रूप में अपग्रेड किया गया है। जीन्द में कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय का रीजनल सेंटर खोला गया है। हिसार के गुरू जम्भेश्वर विश्वविद्यालय का दर्जा बढ़ाकर सांईस एण्ड टैक्नोलोजी विश्वविद्यालय बनाया गया है। हिसार में ही लाला लाजपत राय पशु विज्ञान एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है। फरीदाबाद में वाईएमसीए का स्तर भी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के रूप में अपग्रेड किया गया है। दीन बन्धु छोटू राम कॉलेज आफ इंजीनियरिंग, मुरथल का दर्जा बढ़ाकर विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय कर दिया गया है। जिला रोहतक के गरनावठी में आईआईएम की स्थापना की जा रही है और इसकी कक्षाएं महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक में शुरू हो गई है। हरियाणा सरकार ने चार उत्कृष्ट संस्थान नामतः स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाईन, स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फिल्म एण्ड टेलीविजन, स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फाईन आर्टस और स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ शहरी आयोजना और वास्तुकला की स्थापना की है।
चिकित्सा शिक्षा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अलग राज्य बनने के बाद हरियाणा में कोई भी चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित नहीं किया गया। मेरी सरकार ने ऐसे तीन महाविद्यालय खोले है इससे पूर्व, रोहतक में एक चिकित्सा महाविद्यालय था जिसे अब हमारी सरकार द्वारा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के रूप में अपगे्रड किया गया है। एआईआईएमएस-।। जिला झज्जर के गांव बाढसा में स्थापित किया गया है। परन्तु इसकी आऊटरीच ओपीडी पहले ही चालू हो चुकी है। जिला सोनीपत के खानपुरकलां में भगत फूल सिंह चिकित्सा महाविद्यालय और नर्सिंग कॉलेज की स्थापना की जा रही है। स्वतंत्रत भारत में सार्वजनिक क्षेत्र का यह पहला महिला चिकित्सा महाविद्यालय है। अन्तरीक्ष यात्री कल्पना चावला के नाम पर दूसरा चिकित्सा महाविद्यालय करनाल में स्थापित किया जा रहा है तथा ईएसआई द्वारा फरीदाबाद में एक चिकित्सा महाविद्यालय भी स्थापित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, जिला मेवात के नल्हड़ में एक चिकित्सा महाविद्यालय व हस्पताल और डेंटल कॉलेज व नर्सिंग कॉलेज स्थापित किया जा रहा है। प्रदेश में वर्ष 2005 की केवल 350 सीटों की तुलना में इस समय सरकारी और निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस की कुल 800 सीटे हैं।
इस अवसर पर अनेक जाने माने महानुभाव और शिक्षाविद्घ उपस्थित थे। उन्होंने शिक्षा की दिशा में किए जा रहे हरियाणा सरकार के प्रयासों की सराहना की।
हरियाणा में शिक्षा में निवेश के प्रश्न पर हुड्डा ने कहा कि वर्ष 2005 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद शिक्षा का बजट 23 प्रतिशत तक बढ़ गया है। हरियाणा ऐसा पहला राज्य है जो अनुसूचित जाति और बीपीएल परिवारों के लगभग 20 लाख गरीब विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां दे रहा है। स्कूलों में बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की दर नगण्य हो गई है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने बारे एक प्रश्न के जबाव में हुड्डा ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए प्रदेश में समैस्टर प्रणाली आरम्भ की गई है। मुख्य समस्या अच्छी गुणवत्ता के अध्यापकों की कमी है, जिसके लिए सरकार ने झज्जर में एक नया अध्यापक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किया है। विद्यार्थियों का चहुंमुखी विकास करने के लिए सरकार ने नई खेल नीति बनाई है, जिसके अन्तर्गत खेलों के लिए आधारभूत संरचना के विकास, खेल प्रतिभा खोजने और उन्हें प्रशिक्षण देने पर बल दिया जाता है तथा पदक जीतने वाले खिलाडि़यों के भविष्य को भी सुरक्षित किया जा रहा है।