चंडीगढ़, 29 अप्रैल, 2026 - जुझारूपन, साहस और बिना किसी चर्चा के, चुपचाप हासिल की गई उपलब्धियों के एक दिल को छू लेने वाले जश्न में, 'एजलेस वूमेन स्वारे' ने उन महिलाओं को सुर्खियों में लाया, जो पर्दे के पीछे रहकर अपने परिवार और समाज के लिए असाधारण काम कर रही हैं, और अक्सर उन्हें कोई पहचान नहीं मिलती। यह स्वारे एक ऐसी पहल थी, जिसका समापन प्रतिष्ठित टीडब्ल्यूओएस 26 (टाइमलेस
वूमेन ऑफ स्ट्रेंथ) अवॉर्ड्स के रूप में हुआ।
डॉ. प्रीति जिंदल, संस्थापक-'द टच क्लिनिक' और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, 'इंडियन सोसाइटी ऑफ़ एस्थेटिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव गायनेकोलॉजी' (इनसार्ग) ने कहा कि "कई महिलाएं अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतरीन काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें पहचान नहीं मिल पाती। इस प्लेटफार्म को उनकी कहानियों को सामने लाने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था।"
डॉ. प्रीति ने आगे कहा कि "महिलाओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से तैयार किए गए इस कार्यक्रम का लक्ष्य उन कई महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें वह पहचान दिलाना था, जिसकी वे हकदार हैं; इनमें से कई महिलाएं बेकिंग, शिक्षा और देखभाल जैसे क्षेत्रों में घर से ही काम करती हैं।"
सम्मानित अतिथियों में डॉ. संगीता जैन, सिविल सर्जन, मोहाली, सुश्री गरिमा सिंह, आईआरएस और सुश्री किरण संधू, ओनर, चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ़ कॉलेजेज़ शामिल थीं।
इस स्वारे में नई जानकारियां प्रदान करने वाले नॉलेज सेशन भी आयोजित किए गए। इसका एक मुख्य आकर्षण 'डिकोडिंग ओबेसिटी – ए पाथ टू सस्टेनेबल स्लिमिंग' (मोटापे को समझना – स्थायी रूप से दुबले होने का मार्ग) शीर्षक वाला पैनल डिस्कशन सेशन था, जिसका संचालन डॉ. सुमितु सहदेव ने किया और जिसमें डॉ. प्रीति जिंदल व डॉ. प्रगति टंडन जैसे विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। इस चर्चा में वज़न प्रबंधन के लिए प्रमाण-आधारित दृष्टिकोणों पर ज़ोर दिया गया, और त्वरित उपायों के बजाय जीवनशैली में स्थायी बदलावों को अपनाने की पक्षधारिता की गई।
डॉ. प्रीति ने आगे बताया कि टीडब्ल्यूओएस अवॉर्ड्स हर 2 साल में 'द टच क्लिनिक' द्वारा उन महिलाओं को दिया जाता है, जो जीवन के किसी भी क्षेत्र में अग्रणी तौर पर बेहतरीन काम कर रही हैं। इसमें 7 श्रेणियां हैं, और ये अवॉर्ड्स पूरी तरह निष्पक्ष है, क्योंकि प्रतिष्ठित सदस्यों की एक जूरी निष्पक्ष चयन सुनिश्चित करने के लिए बिना नामों के प्राप्त एंट्रीज की समीक्षा करती है। टच वुमन ऑफ सब्स्टेंस (टी
डब्ल्यू ओ एस ) अवार्ड्स 2026 के लिए प्रतिष्ठित जूरी में सुश्री अरुणा चट्टोपाध्याय, सुश्री रीतिन्दर मोहन, सुश्री पारू सिंधु, सुश्री सीमा विनायक, सुश्री रितिका सिंह, सुश्री सीमा तलवार, सुश्री रचना सिंह, डॉ. लाडबंस कौर, सुश्री मोनिका बाहवा, डॉ. मधु गुप्ता और सुश्री सौम्या रस्तोगी शामिल थे।
टीडब्ल्यूओएस 26 अवॉर्ड्स के बारे में बात करते हुए, डॉ. प्रीति ने कहा कि पूरे क्षेत्र से 100 से ज़्यादा नॉमिनेशन मिले थे। इन एंट्रीज का एक व्यवस्थित और बारीकी से मूल्यांकन किया गया, जिसके लिए जूरी में अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली जानी-मानी और सफल महिलाएं शामिल थीं।
उन्होंने कहा कि “मजबूती, बदलाव और प्रभाव जैसे पैमानों के आधार पर, 25 महिलाओं को चुना गया और समारोह के दौरान सम्मानित किया गया। हर विजेता की अपनी एक अनोखी कहानी थी।” खास बात यह है कि टीडब्ल्यूओएस आइकन अवॉर्ड्स और एक डीवा अवॉर्ड भी दिए गए।
इंस्पायरिंग महिलाओं के अवॉर्ड भी काबिल महिलाओं को दिए गए। एक प्रेरणादायक कहानी जोबन संधू की है, जिन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान ब्रेस्ट कैंसर का पता चला था; उन्होंने टच क्लीनिक में समय पर इलाज करवाया और अब वह दो बच्चों के साथ पूरी तरह स्वस्थ हैं। अनु ढींगरा ने डर के बजाय हिम्मत चुनी और रोबोटिक हिस्टेरेक्टॉमी को अपनाया, जिससे उन्होंने पूरे आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ महिलाओं की सेहत के भविष्य की ओर कदम बढ़ाया। अरुति नायर ने महिलाओं से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए रोबोटिक हिस्टेरेक्टॉमी को चुनकर इनोवेशन, सटीकता और अपनी शारीरिक और मानसिक केयर को प्राथमिकता दी।
इस कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि रोबोटिक सर्जरी के कई फायदे हैं। यह बहुत सटीक होती है, इसमें खून का नुकसान बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता, इससे मरीज जल्दी ठीक हो जाते हैं, और कई मामलों में तो मरीज़ों को उसी दिन या अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी भी मिल जाती है।
इन्होंने पाई मुश्किलों पर जीतआगे बढ़ते हुए, अवॉर्ड पाने वालों में सुश्री बृजेश भी शामिल थीं, जिन्होंने कई बार गर्भपात होने के बावजूद उम्मीद नहीं छोड़ी और आखिरकार मां बनने का सुख पाया। एक और प्रेरणादायक कहानी इंदरप्रीत भट्टी की है, जिन्होंने आईवीएफ के 12 प्रयासों के बाद गर्भधारण किया और अब वह अपने दूसरे बच्चे की उम्मीद कर रही हैं। प्रेरणा जैन को भ्रूण के विकास में रुकावट की समस्या का सामना करना पड़ा था और उन्हें गर्भपात करवाने की सलाह दी गई थी, लेकिन सही गाइडेंस मिलने पर उन्होंने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। प्रियंका गर्ग को प्रेग्नेंसी के शुरुआती दौर में गर्भ में पानी की कमी और भ्रूण के विकास में गंभीर रुकावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था, लेकिन सही मेडिकल मदद और अपने सकारात्मक रवैये की बदौलत उन्होंने इन मुश्किलों पर जीत हासिल की। बरखा को प्रेग्नेंसी के दौरान कई तरह की जटिलताओं (गर्भ में पानी की कमी, हाई ब्लड प्रेशर, भ्रूण के विकास में रुकावट) का सामना करना पड़ा था। लेकिन सही देखभाल मिलने पर उन्होंने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया, जो अब 6 साल का हो चुका है।