PUNBUS/PRTC का प्राइवेटाइज़ेशन करके, किलोमीटर स्कीम बसों के ज़रिए अपने चहेतों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए कर्मचारियों को 3 महीने से जेलों में कर रखा है बंद:
AAP सरकार ने ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में एक भी सरकारी बस नहीं जोड़ी और न ही किसी कर्मचारी को किया परमानेंट, आउटसोर्स भर्ती है जारी: शमशेर सिंह ढिल्लों
सरकारी विभागों की लूट जारी, सरकार के चहेतों द्वारा नौजवानों का हो रहा शोषण, पर्चे देकर जुबान बंद करने की हो रही कोशिश:- हरकेस कुमार विक्की
चंडीगढ़ 5 मार्च- पंजाब रोडवेज़ PUNBUS/PRTC कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब 25/11 के प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने चंडीगढ़ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट चलाने में फेल साबित हुई है क्योंकि पिछले 4 सालों में एक भी सरकारी बस नहीं रखी गई और न ही किसी कच्चे कर्मचारी को परमानेंट किया गया।
विधानसभा सेशन के दौरान हम पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बड़े-बड़े झूठ सुनते हैं कि ठेकेदार मंत्रियों के बिचौलिए हैं और हम उन्हें बाहर निकाल देंगे, लेकिन पनबस में 4 साल में 4 ठेकेदार बिचौलिए बदल दिए गए हैं। हर ठेकेदार ने विभाग और कर्मचारियों से सिक्योरिटी, EPF, ESI के करोड़ों रुपये लूटे हैं।
आउटसोर्स और भर्ती में लाखों रुपये रिश्वत के जरिए किए जा रहे हैं, जिसका सबूत सरकार को दिया जा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि वह ट्रांसपोर्ट माफिया को खत्म कर देंगे, लेकिन इसके उलट सरकार सरकारी ट्रांसपोर्ट को खत्म करने की तरफ बढ़ रही है।
पिछले 4 साल में एक भी सरकारी बस नहीं चलाई गई। उल्टा, किलोमीटर स्कीम के जरिए विभाग को लूटने के लिए बड़े पैमाने पर अपने चहेतों की बसें सरकारी परमिट पर चलाकर विभागों को खत्म करने की पॉलिसी अपनाई जा रही है। पिछली सरकारों के दौरान हर सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में 12-1300 सरकारी बसें बेची हैं। पंजाब रोडवेज पनबस/PRTC भी डिपार्टमेंट की मालिकी वाली बसों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन इस AAP सरकार को बने 4 साल से ज़्यादा हो गए हैं।
अब तक सरकार ने एक भी सरकारी बस का इस्तेमाल नहीं किया है। उल्टा, सरकार के समय में 500 से ज़्यादा बसों पर बैन लगा दिया गया है। मौजूदा सरकार सिर्फ़ बयान दे सकती है और ऐड लगा सकती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर एक भी मांग हल नहीं हुई है। डिपार्टमेंट को बचाने और प्राइवेटाइज़ेशन रोकने के अलावा, अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे कर्मचारियों को उनके घरों से निकालकर 307 और 28-11-2025 जैसी धाराओं के तहत जेल में डाल दिया गया है।
अब सरकार ने कर्मचारियों को जेलों में डाल दिया है और अपने चहेतों (प्राइवेट मालिकों) की किलोमीटर स्कीम बसों का शोर मचा रही है जो नीले और स्प्रिंग रंग की हैं और जिनकी बॉडी राजस्थान की है। असल में, वे बसें किलोमीटर स्कीम बसें हैं जो सरकार के चहेतों की हैं और करोड़ों रुपये डिपार्टमेंट और सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए लाई गई हैं।
उन बसों से हुए नुकसान के सारे सबूत भी सरकार की बनाई कमेटी को दिए गए थे और डिपार्टमेंट के ऑफिसर को लीगल नोटिस देकर भी बताया गया था, लेकिन सरकार की मंशा प्राइवेट ऑपरेटरों को फायदा पहुंचाना और डिपार्टमेंट को प्राइवेट करने की मंशा पूरी करना था, कर्मचारियों की जुबान पर ताला लगाना था, गैर-कानूनी कागज दाखिल करके टेंडर खोले गए और पंजाब के लोगों की संस्था को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, यानी डिपार्टमेंट धीरे-धीरे कॉर्पोरेट घरानों को बेचे जा रहे हैं।
इससे सरकार की सोच पता चलती है कि यह सरकार लोगों की हिमायती सरकार नहीं है, यह सिर्फ झूठे प्रोपेगैंडा पर बनी सरकाXर है और पंजाब को लूटने के लिए कर्मचारियों की मांगों को हल करने की कोशिश कर रहे कर्मचारियों की आवाज को दबा रही है।