सीरी में विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आमंत्रित व्यानख्यान का आयोजन
पिलानी, 13 जनवरी, सीएसआईआर-सीरी में विश्व हिंदी दिवस गरिमामयी ढंग से मनाया गया। इस उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में श्रीमती इंद्रमणि मंडेलिया शिक्षा निकेत, पिलानी के प्रोफेसर नितेन्द्र पाठक, विभागाध्यक्ष, कला (मानविकी) संकाय ने अपने विश्व हिंदी दिवस संबोधन में वैश्विक और भारतीय परिदृश्य में हिंदी के प्रभाव, प्रभुत्व और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की।
अपने सारगर्भित एवं प्रेरक आमंत्रित व्याख्यान में प्रोफेसर पाठक ने कहा कि व्यक्ति को अपने विकास के लिए अधिक से अधिक भाषाएँ सीखनी चाहिए परंतु अपनी भाषा के प्रति गर्व का भाव होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उल्लेख किया कि हिंदी विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है तथा भारत में सर्वाधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा के रूप में इसकी सशक्त उपस्थिति है।
उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों और भाषायी आंकडे प्रस्तु्त करते हुए कहा कि हमें किसी भी रूप में हिंदी के भविष्य को लेकर निराशावादी नहीं होना चाहिए। प्रो. पाठक ने क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे व्यापक राष्ट्रीय प्रयासों की चर्चा करते हुए बताया कि उच्च शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए अधिक सुलभ बनाने के लिए इंजीनियरिंग एवं मेडिकल शिक्षा भी हिंदी में आरंभ की जा चुकी है, जो हिंदी के उज्ज्वल भविष्य का स्पष्ट संकेत है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सुचंदन पाल, मुख्य वैज्ञानिक ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने विश्व हिंदी दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए आयोजन के महत्व को रेखांकित किया तथा सभी को विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर संस्थान की वार्षिक विज्ञान पत्रिका ‘इलेक्ट्रॉनिक दर्पण, वर्ष 2025, अंक–9’ का विमोचन भी किया गया। प्रोफेसर पाठक ने पत्रिका के नवीनतम अंक में प्रकाशित शोधपत्रों एवं वैज्ञानिक लेखों के लेखकों को प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया।
आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. अयन कुमार बंद्योपाध्याय, मुख्य वैज्ञानिक ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम का संचालन संस्थान के वरिष्ठ हिंदी अधिकारी रमेश बौरा ने किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में डॉ सुचंदन पाल, पीएमई प्रमुख प्रमोद तँवर, राजभाषा कार्यान्वियन समिति एवं इलेक्ट्रॉनिक दर्पण प्रकाशन समिति के सदस्यों सहित वरिष्ठ वैज्ञानिक, अधिकारीगण एवं अन्य सहकर्मी उपस्थित थे।