19 जनवरी को गुरुग्राम में बड़े संघर्ष का ऐलान: दर्शन सिंह घोलिया
चंडीगढ़, 2 जनवरी, 2026 :— 1984 में हरियाणा के चिल्लर, गुड़गांव, पटौदी, गुड़ा महेंद्रगढ़ और दूसरे इलाकों में हुए भयानक सिख हत्याकांड को 42 साल बीत जाने के बावजूद, पीड़ित सिख परिवार अभी भी पूरे इंसाफ से महरूम हैं। दोषियों को सज़ा न मिलना और पीड़ितों को उनके हक न मिलना केंद्र और राज्य सरकारों की परफॉर्मेंस पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस गंभीर मुद्दे को लेकर होद चिल्लर सिख जस्टिस कमेटी की तरफ से चंडीगढ़ के प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। इस मौके पर हरियाणा और दूसरे राज्यों से आए 1984 के पीड़ितों के परिवारों ने एक साथ मिलकर अपनी आवाज़ उठाई और इंसाफ के लिए संघर्ष के अगले पड़ाव पर चर्चा की। के होड़ छिल्लर सिख जस्टिस कमेटी के प्रेसिडेंट दर्शन सिंह घोलिया ने कहा कि पिछले चार दशकों में सरकारों ने सिर्फ आश्वासन और घोषणाएं की हैं, लेकिन पीड़ितों को अभी तक ज़मीनी स्तर पर न्याय नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति डेमोक्रेटिक सिस्टम की नाकामी दिखाती है और पीड़ित परिवारों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है।
भाई घोलिया ने ऐलान किया कि अगली ज़रूरी मीटिंग 19 जनवरी को गुड़गांव में होगी ताकि बड़े पैमाने पर संघर्ष शुरू किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई तब तक लगातार जारी रहेगी जब तक छिल्लर और दूसरे इलाकों के दोषियों को सज़ा नहीं मिल जाती और पीड़ित परिवारों को सम्मान, न्याय और उनके कानूनी अधिकार नहीं मिल जाते।
इस दौरान यह भी ऐलान किया गया कि हरियाणा सरकार द्वारा दिए गए पीड़ित परिवारों के अपॉइंटमेंट लेटर कैंसिल कर दिए जाएंगे। पीड़ितों ने कहा कि नौकरी या अधूरे फायदे न्याय का विकल्प नहीं हो सकते और असली न्याय तभी है जब दोषियों को सज़ा मिले। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़ित राम सिंह गुड़गांव, गोपाल सिंह रेवाड़ी (हरियाणा), दर्शन सिंह हेली मंडी पटौदी, अंकित कुमार, हरभजन सिंह हनुमानगढ़, रोबिन कौर गुड़गांव, हरदीप सिंह पटियाला, रविंदर सिंह हरियाणा, अमरीक सिंह, कुलतार सिंह कालियांवाली मंडी सिरसा और हरप्रीत सिंह खालसा अमृतसर के साथ-साथ दूसरे पीड़ित परिवार मौजूद थे। अपने दर्दनाक अनुभव शेयर करते हुए पीड़ितों ने कहा कि वे नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर अपनी आवाज़ उठाने के लिए पक्के इरादे वाले हैं।