चंडीगढ - कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र महिलाओं के प्रति अपराधों को रोकने के लिए विश्वविद्यालय में जीरो टॉलरेंस पोलिसी अपनाएगा। विश्वविद्यालय में अगर कोई ऐसी घटना सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति लै जनरल डॉ. डीडीएस संधु आज कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के महिला शोध एवं अध्ययन केन्द्र के द्वारा आर के सदन में महिला अपराध रोकथाम संबंधी संस्थागत प्रयास विषय पर आयोजित एक दिवसीय कांफे्रंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा है कि समाज में महिलाओं के प्रति बढ़ रहे अपराधों को रोकने के लिए व्यक्तिगत, संस्थागत व एक समूह के रूप में आत्म मंथन कर इस अपराध की जड़ तक पहुंचना होगा।
उन्होंने कहा कि आज हमें एक बार फिर अपने पुराने पारंपरिक नैतिक मूल्यों की ओर लौट कर नई पीढ़ी को इस तरह की शिक्षा देनी होगी कि वे समाज में महिलाओं के महत्व को समझें और उनके साथ समानता का व्यवहार करें। इसके लिए सभी शिक्षण, सरकारी-गैरसरकारी संस्थाओं व सामाजिक संगठनों को एक साथ मिलकर काम करना होगा। कुरू क्षेत्र विश्वविद्यालय का यह नैतिक कर्तव्य है कि वह समाज में ऐसे कार्यक्रम चलाए जिससे लोगों में जागरूकता बढ़े व ऐसे अपराध समाज में न हों। महिला शोध अध्ययन केन्द्र द्वारा आयोजित यह कांफे्रंस उसी जागरूकता कार्यक्रम का हिस्सा है।
पंजाब विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर रजनीश गिल ने कहा कि महिलाओं के प्रति आज हमें अपना नजरिया बदलने की जरूरत है और संवेदनशीलता के साथ हमें इस अपराध को रोकने के लिए हर स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है। उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण समाज में जो विकृतियां पैदा हुई हैं उसके लिए हमें योजनाबद्ध तरीके से काम करने की आवश्यकता है।
चण्डीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक नौनिहाल सिंह ने कहा कि चण्डीगढ़ पुलिस ने महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं जिससे इनकी संख्या में काफी कमी आई है। लेकिन इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान की आवश्यकता है और यह काम स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों की सहायता के बिना नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि हमें महिलाओं को यह बताने की जरूरत है कि किसी भी अपराध की स्थिति में उसको छुपाने की बजाए उसकी शिकायत पुलिस में की जाए 1योंकि जब तक समस्या सामने नहीं आएगी उसका समाधान कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति अपराध को रोकने के लिए पुलिस व शिक्षण संस्थानों को मिलकर काम करना चाहिए। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की एडवोकेट मधुदीप सिंह ने कहा कि शिक्षण संस्थाओं में लिगल काउंसलिंग सैल स्थापित किये जाने की आवश्यकता है ताकि ऐसे अपराधों को लेकर युवाओं में कानूनी जागरूकता बढ़े। इसके साथ ही महिलाओं को इस तरीके से शिक्षित किये जाने की आवश्यकता है कि वे किसी भी स्थिति का मुकाबला कर सकें।
महिला अध्ययन शोध केन्द्र की निदेशिका प्रो. रीचा तंवर ने कहा कि अब समय आ गया है हम समाज में लिंग समानता के बारे में विचार करें और महिलाओं के बारे में अपने सोचने के नजरिये में बदलाव लाएं तभी एक खुशहाल समाज के सपने को साकार किया जा सकता