चण्डीगढ़ - पण्डित भगवत दयाल शर्मा स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान, रोहतक के बॉयोटैक्नोलोजी एंड मोलिक्यूलर मैडिसन विभाग में 3 से 21 जनवरी तक मैडिकल लैब्रोरेट्री टैक्निशियनों (एमएलटी) के लिए एक विशेष विनटर रोटेशन कोर्स का आयोजन किया गया। एमएलटी किसी भी चिकित्सा संस्थान की रीड की हड्डी होते हैं, जो मरीजों की बीमारी का पता लगाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन द्वारा दिया गया डाटा व रिकॉर्ड के अनुसार ही चिकित्सक मरीज का बेहतर इलाज कर पाने में सक्षम हो पाता है।
नवनियुक्त एमएलटी एवं बीएससी मैडिकल एमएलटी कोर्स के छात्रों को मोलिक्यूलर तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया। आमतौर पर जांचों के लिए पारंपरिक, बॉयोकैमिकल, माईक्रोबॉयोलोजिकल एवं पैथोलोजिकल तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं, परतु अब इस विशेष कोर्स को करने के बाद मोलिक्यूलर तरीकों के इस्तेमाल से बीमारियों के निदान में तेजी आएगी, जिससे शीध्र ईलाज आरंभ होने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। इस ट्रेनिंग के दौरान उन्हें प्रैक्टिकल व प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया गया और उन्हें एक कामयाब मोलिक्यूलर टैक्निशियन बनने के लिए तैयार किया गया। प्रशिक्षार्थियों ने टिश्यू बॉयपशिज व ब्लड सैल से डीएनए को अलग करना भी सीखा। टैक्निशियन के लिए मोलिक्यूलर तरीकों के प्रयोग से बीमारियों का पता लगाने का यह प्रशिक्षण पहली बार दिया गया है।
डॉ. धारा धौलाखंडी ने बताया कि ट्रेनिंग पर आए सभी प्रशिक्षार्थियों को यह प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि मोलिक्यूलर युग में मोलिक्यूलर तकनीकों का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है,जिसके लिए इस प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कुलपति डॉ.एस.एस.सांगवान ने विभाग के इस प्रयास की सराहना की। निदेशक डॉ. चांद सिंह ढुल ने कहा कि इस प्रशिक्षण का आने वाले समय में प्रदेश के लोगों को बहुत लाभ मिलेगा और मोलिक्यूलर डायगनोसिज आज के समय की जरुरत भी है।