यमुनानगर - हथनीकुंड बैराज से शनिवार को छोड़ा गया एक लाख 48 हजार क्यूसिक पानी अब अपना रंग दिखाने लगा है। यमुना के पानी ने यमुनानगर जिले के यमुना के साथ लगते कई गांवों की जमीन को यमुना में मिलाने का काम शुरू कर दिया है। पानी यमुना के किनारों पर कटाव कर किसानों की खेती की जमीन को यमुना में मिला रहा है। कटाव को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा यमुना के किनारे पर लगाए गए मिट्टी के कट्टे भी इस कटाव को नहीं रोक पा रहे हैं। वहीं, इस साल बाढ़ बचाव कार्य ठीक से शुरू न हो पाने के कारण यमुना में पानी आते ही लोगों को फिर से बीते जून महीने की याद आ जाती है, जिसे याद कर वह सहम जाते हैं। उधर, स्थानीय अधिकारी इसे उच्च स्तर का मामला बताकर कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं।
शनिवार को हथनीकुंड बैराज से यमुना में एक लाख 48 हजार क्यूसिक पानी छोड़ा गया था। समय गुजरने के साथ ही यमुना का पानी अपनी रफ्तार से आगे बढ़ा रहा है। अब इस पानी ने यमुनानगर जिले में यमुना किनारों पर किसानों की जमीन पर अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। यमुना के पानी को अपने खेतों की तरफ आता देखकर किसानों की भी नींद उड़ गई है। किसान व ग्रामीण यमुना में आए पानी के कारण पूरी तरह से सहमे हुए हैं। ये लोग रात को सो भी नहीं पा रहे हैं।
जून माह में यमुना नदी में आए लाखों क्यूसिक पानी से हुई तबाही के बाद प्रशासन ने यह कहा था कि इस बार मानसून से पहले ही यमुना में पानी आ गया है। इसके कम होते ही बाढ़ बचाव कार्य पूरे कर लिए जाएंगे, लेकिन एक माह गुजर जाने के बाद भी इस दिशा में प्रशासन द्वारा कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए। यदि कुछ किया है तो यह कि यमुना के किनारों पर केवल मिट्टी के कट्टे रखे गए हैं, लेकिन इस बार यमुना में आए पानी ने इन कट्टों को भी नष्ट करना शुरू कर दिया है। यमुनानगर जिले के बूडिय़ा, ईस्माइलपुर, बीबीपुर, बेगमपुर, संधाला-संधाली, लापरा, बड़ी पाबनी, कैत मंडी, कमालपुर, छोटा बांस सहित अनेक गांवों में यमुना के पानी ने कटाव शुरू कर दिया है।