चंडीगढ़ - हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस विजेन्द्र जैन ने आज भ्रूण की सुरक्षा के लिए और अधिक सख्त कानून बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यूरोपियन देशों में भू्रण तीन महीने तक माता की सम्पति होता है और इसके उपरान्त यह समाज की सम्पति हो जाता है।
वे, आज यहां हरियाणा मानवाधिकार आयोग के कार्यालय भवन का उद्घाटन करने के अवसर पर एक प्रैस सम्मेलन को सम्बोंधित कर रहे थे।
न्यायामूर्ति विजेन्द्र जैन ने कहा कि यद्यपि हमारे देश में प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम है, जिसके अनुसार भू्रण के लिंग का पता लगाना दण्डनीय अपराध है। फिर भी इसकी सुरक्षा के लिए सख्त कानूनों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए कि भू्रण समाज की सम्पति है और कोई भी व्यक्ति इसे नष्ट नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि आयोग निश्चित रूप से राज्य सरकार को ऐसे उपाय सुझाएगा।
एक प्रश्न के जवाब में जैन ने स्पष्ट किया कि आयोग को दी जाने वाली प्रत्येक शिकायत के साथ शपथ पत्र देना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पाया गया है कि कुछ मामलों में लोगों द्वारा आधारहीन आरोप लगाये जाते हैं, इसलिए शपथ पत्र केवल तभी जमा किये जाने की आवश्यकता होती है जब इसके लिए यदि आयोग शिकायतकर्ता से पूछता है।
उन्होंने कहा कि पुलिस, राजस्व और खनन जैसे विभागों की शिकायत आयोग के कार्यालय में प्राप्त हो रही हैं। शिकायत के निपटान की समय-सीमा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह शिकायत की प्रकृति पर निर्भर करता है।
एक अन्य प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि यदि हमें बाल श्रम के सम्बन्ध में शिकायतें मिलती हैं तो आयोग के पास दोषी के विरूद्घ कार्यवाही करने की शक्तियां हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई मामला आयोग के ध्यान में आता है तो आयोग कार्यवाही करेगा।