सोनीपत - संत गोपालदास ने कहा कि गौ-चरान भूमि को कब्जा मुक्त करवाने व गोचर भूमि विकास बोर्ड के गठन की मांग को पूरा नहीं किया गया तो वे 28 जून को यमुना में संथारा (इच्छा मुत्यु) ले लेंगे। उन्होंने उनकी मांगों को पूरा करने के लिए सरकार व प्रशासन को 27 जून तक का समय दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की त्रासदी प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का नतीजा है।
वे सोमवार को विश्राम गृह में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। संत गोपालदास ने कहा कि प्रदेश में गौ-चरान भूमि को मुक्त करवाने व गोचर भूमि विकास बोर्ड का गठन करने के लिए उन्होंने संकल्प लिया था। वे अपनी मांगों को लेकर 10 मई से आमरण अनशन पर हैं। उसके बावजूद प्रदेश सरकार व प्रशासन ने उनकी मांगों को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं की है। जिससे आहत होकर अब संकल्प पूरा नहीं होते देख उन्होंने संथारा लेने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि 27 जून को सोनीपत में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए आ रहे हैं। अगर उन्होंने 27 जून को गौ-चरान भूमि के संबंध में कोई ठोस घोषणा नहीं की तो वे 28 जून को यमुना में संथारा ले लेंगे। उन्होंने कहा कि संथारा कोई आत्महत्या नहीं है, संतों द्वारा वर्षों से इस परंपरा को निभाया जा रहा है।
उन्होंने इसके लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख दिया है। संत गोपालदास ने कहा कि भारत जैसे देश में जहां गाय को मां का दर्जा प्राप्त है, वहां पर गाय की रक्षा करने के लिए गोचर विकास बोर्ड बनाने में सरकार का ठोस पहल नहीं करना उन्हें अखर रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान देश में गौ-चरान भूमि नहीं होने से गायों के साथ ही अन्य पशु पक्षी भी विलुप्त हो रहे हैं। जीवहित के लिए उन्हें संथारा लेने का निर्णय लेना पड़ा है। उन्होंने संथारा में प्रशासन से व्यवधान नहीं करने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि गाय की रक्षा को शुरू किया गया उनका आंदोलन अब लगातार जारी रहेगा। सोनीपत में भी 17 लोग अनशन कर रहे हैं। उन्होंने अनशनकारियों को जेल में बंद करने की निंदा की। इस दौरान राजबीर गहलावत ने कहा कि सरकार को संतों की रक्षा करनी चाहिए।