चण्डीगढ़ - हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (हरेडा) ने आज 25 मैगावाट खोई/बायोमास आधारित स्वउत्पादन बिजली परियोजना स्थापित करने के लिए नारायणगढ़ चीनी मिल लि0,अम्बाला के साथ एक क्रियान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
अक्षय ऊर्जा विभाग तथा हरेडा के महानिदेशक अरुण कुमार ने हरेडा की ओर से तथा नारायणगढ़ चीनी मिल लि0,अम्बाला के कार्यकारी निदेशक जितेन्द्र आनंद ने चीनी मिल की ओर से समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह बिजली परियोजना चीनी मिल की विस्तार प्रक्रिया के तहत स्थापित की जा रही है, जहां मिल की पिराई क्षमता 2500 टन गन्ना प्रतिदिन को बढ़ाकर 5500 टन गन्ना प्रतिदिन की गई है।
अरुण कुमार ने कहा कि बिजली संयंत्र की स्थापना 116.09 करोड़ रुपये की लागत से नारायणगढ़ चीनी मिल,गांव बनौड़ी, तहसील नारायणगढ़,जिला अम्बाला में की जाएगी। परियोजना गन्ना पिराई अवधि के दौरान लगभग 16.92 मैगावाट और पिराई अवधि के बाद लगभग 22.43 मैगावाट बिजली का निर्यात करेगी। मिल में गन्ना पिराई अवधि में लगभग 140 दिन और बे-मौसम अवधि में 190 दिन यह संयंत्र संचालित रहेगा।
इस परियोजना की मुख्य विशेषता यह है कि जहां चीनी मिलों में अन्य खोई आधारित स्वउत्पादन बिजली परियोजनाएं केवल गन्ना पिराई मौसम के दौरान ही संचालित हैं, वहीं यह परियोजना वर्ष भर लगभग 330 दिन संचालित रहेगी। यह 171 दिनों के लिए अपनी स्वयं की खोई का उपयोग करेगा और लगभग159 दिनों के लिए निकटवर्ती क्षेत्रों से अन्य बायोमास की खरीद करेगा,जिससे किसान लाभान्वित होंगे और संयंत्र एवं मिशीनरी का वर्ष भर उपयोग सुनिश्चित होगा।भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी इस परियोजना के लिए पहले ही 103.39 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत कर चुकी है। मौसम के दौरान उत्पादन लागत लगभग 4.21 रुपये प्रति यूनिट रहने की सम्भावना है। इस परियोजना के पूरी तरह संचालित होने के उपरान्त लगभग 143.22 एमयूएस का निर्यात किया जा सकेगा।
बिजली निगमों द्वारा बिजली की खरीद हरियाणा बिजली विनियामक आयोग द्वारा निर्धारित की गई दरों पर की जाएगी, जिसके लिए हरियाणा बिजली खरीद केन्द्र और परियोजना डैवलेपर के बीच एक बिजली खरीद समझौता किया जाएगा। यह परियोजना केन्द्रीय नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय से 1.20 करोड़ रुपये की केन्द्रीय वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए पात्र होगी।
आज हस्ताक्षरित किए गए क्रियान्वयन समझौते में नारायणगढ़ चीनी मिल को परियोजना शुरू करने के लिए 22 महीने का समय दिया गया है और उसने निर्धारित समयावधि के भीतर परियोजना को शुरू करने की अपनी प्रतिबद्घता के रूप में हरेडा के पास 1.25 करोड़ रुपये जमा करवाए है। नारायणगढ़ चीनी के कार्यकारी निदेशक जितेन्द्र आनंद ने आश्वासन दिया है कि वे निर्धारित समय से पहले परियोजना को शुरू करने का प्रयास करेंगे।
अरुण कुमार ने कहा कि हरियाणा में 14 चीनी मिलें हैं, जिनकी कुल गन्ना पिराई क्षमता लगभग 42000 टन गन्ना प्रतिदिन और बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 175 मैगावाट है। इनमें से लगभग 51 मैगावाट की परियोजनाएं राज्य में स्थापित की गई है। इनमें शाहबाद (24 मैगावाट),रोहतक (16 मैगावाट), सोनीपत (एक मैगावाट),महम (1.8 मैगावाट), गोहाना (दो मैगावाट) और असंन्ध (छः मैगावाट) शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि चीनी मिलों में स्वउत्पादन चीनी मिलों का लाभ ही नहीं बढ़ता बल्कि बिजली आपूर्ति बढ़ाने के लिए उपलब्ध खोई का समुचित उपयोग भी सुनिश्चित करता है।
इस अवसर पर अक्षय ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त निदेशक डी के चोपड़ा, हरेडा के चीफ साईंटिफिक इंजीनियर, पी के यादव, महाप्र्रबंधक ए के मित्तल, नारायणगढ़ चीनी मिल के मुख्य अभियन्ता वी के सिंह के अतिरिक्त विभाग और नारायणगढ़ चीनी मिल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थिति थे।