शिमला - तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम 2003 की धारा 4 के अंर्तगत आज जिला शिमला को धूम्रपान मुक्त जिला घोषित किया गया। उपायुक्त शिमला दिनेश मल्होत्रा ने आज यहां आयोजित कार्यक्रम में इस आशय का प्रमाणपत्र जारी किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिमला जिला में आई.जी.एम.सी. के माध्यम से पांच मापदंडों के आधार पर सर्वे करवाया गया जिसकी रिपोर्ट में पाया गया कि जिला शिमला में इन मापदंडों की अनुपालना 92.17 प्रतिशत रही जोकि ग्रामीण क्षेत्रों में 89.64 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्रों में 96.65 रही। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि तम्बाकू तथा दूसरे नशों के दुष्प्रभावों की लोगों को जानकारी दें ताकि स्वस्थ समाज की संकल्पना पूरी हो सके।
हिमाचल प्रदेश में अभी तक 60 हजार लोगों के इस अधिनियम के तहत चालान काटे जा चुके हैं। स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी जिला शिमला डा. महेश जसवाल ने बताया कि तंबाकू के धुएं में 4000 तरह के विषैले रसायन होते हैं जो मनुष्य के स्वास्थ्य का कचरा बना देते हैं। प्रत्येक सिगरेट मनुष्य के जीवन को 11 मिनट कम कर देती है। विश्व में 55 लाख लोग और भारत में 10 लाख लोग तंबाकू के सेवन से जुड़ी बीमारियों की वजह से काल का ग्रास बनते हैं। मुंह के कैंसर के 100 मामलों में से 95 तंबाकू सेवन से जुड़े होते हैं। उन्होंने बताया कि सिगरेट पीने वाला व्यक्ति अपना नुक्सान तो करता ही है परन्तु अपने आसपास बैठे व्यक्तियों का ज्यादा नुकसान करता है।