दो हफ्ते से अधिक खांसी हो तो टीबी जांच कराएं : डॉ. नवनीत अरोड़ा
बीमारी की जल्दी पहचान बहुत जरूरी: पारस हेल्थ पंचकुला ने विश्व टीबी दिवस पर भारत को टीबी मुक्त करने का किया आह्वान
भारत में पूरी दुनिया के कुल टीबी केसों का 26% हिस्सा है, यहां पर प्रति 100,000 लोगों पर 195 टीबी के केस
पंचकूला, 24 मार्च : विश्व टीबी दिवस के अवसर पर पारस हेल्थ पंचकूला के डॉक्टरों ने क्षय रोग (टीबी) से निपटने के लिए जल्दी डायग्नोसिस और समय पर इलाज़ के महत्व पर जोर दिया हैं और भारत के टीबी मुक्त होने के मिशन का समर्थन किया हैं। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत टीबी उन्मूलन में देश की प्रगति के साथ विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता, जांच और प्रारंभिक चिकित्सा हस्तक्षेप महत्वपूर्ण हैं।
डॉ रॉबिन गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, पलमोनोलॉजी ने कहा, “भारत के नवीनतम टीबी डेटा के अनुसार, टीबी की प्रचलन दर 2015 में प्रति लाख जनसंख्या पर 237 मामलों से 17.7% घटकर 2023 में प्रति लाख 195 हो गई है, और इसी अवधि के दौरान टीबी से संबंधित मौतों में 21.4% की कमी आई है। हालाँकि इन सुधारों के बावजूद नए टीबी केसों का पता लगाने में वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण टेस्टिंग में वृद्धि और बढ़ी हुई जागरूकता है।”
उन्होंने लोगों को टीबी के सामान्य लक्षणों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। इन लक्षणों में लगातार खांसी, थूक में खून आना, बिना किसी कारण के वजन कम होना, रात में पसीना आना और बुखार होना आदि शामिल हैं। डायबिटीज, हृदय सम्बंधी बीमारी या कमज़ोर इम्युनिटी जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे कि उन्हें भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने पर N95 मास्क पहनना चाहिए।
रोकथाम उपायों पर जोर देते डॉक्टर ने संतुलित डाइट, सही हाइड्रेशन और नियमित एक्सरसाइज़ तथा पर्याप्त नींद से इम्यूनिटी मज़बूत करने की सलाह दी। डॉ रॉबिन ने कहा, “टीबी का इलाज़ संभव है बशर्ते इसका इलाज़ जल्दी शुरू किया जाए। सबसे जरूरी है कि लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए और बिना किसी देरी के डॉक्टर को दिखाया जाए।”
डॉ नवनीत अरोड़ा, कंसल्टेंट, इन्फेक्शियस डिजीजेज ने बताया, “जिन व्यक्तियों को दो हफ्ते से ज्यादा समय तक लगातार खांसी आती है, उन्हें ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) की संभावना को खत्म करने के लिए एक बेसिक स्पिटम टेस्ट करवाना चाहिए। यह एक ऐसी बीमारी है जो एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है। यह पहचानना जरूरी है कि टीबी हर किसी को प्रभावित कर सकती है, फिर वह चाहे अमीर हो या गरीब, या किसी बड़े ओहदे पर हो। जल्दी पता लगाने और उचित इलाज़ के साथ टीबी का इलाज़ संभव है।”
स्टेरॉयड और इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं के दुरुपयोग को टीबी के पुनः सक्रिय होने और नए संक्रमणों के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि से जोड़ा गया है। डॉ. नवनीत ने कहा कि महामारी के बाद के दौर में यह खतरा और भी बढ़ गया है, क्योंकि कमज़ोर इम्युनिटी ने टीबी के केसों में वृद्धि की है।
संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) दिशा-निर्देशों के साथ अब टीबी के सक्रिय केसों का पता लगाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इससे अब बेहतर डायग्नोसिस और सफल इलाज़ परिणाम मिल रहे हैं। टीबी उन्मूलन और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जागरूकता को मजबूत करना और प्रारंभिक हस्तक्षेप महत्वपूर्ण बना हुआ है।
पारस हेल्थ पंचकूला टीबी के बारे में जागरूकता बढ़ाने, सक्रिय जांच को बढ़ावा देने और मरीजों के लिए व्यापक देखभाल सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्व टीबी दिवस पर हॉस्पिटल लोगों से अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी लेने और टीबी के खिलाफ भारत की लड़ाई में योगदान देने का आग्रह करता है।