चंडीगढ़ - हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी ने परीक्षार्थियों की मांग पर उत्तरपुस्तिकाओं की फोटोप्रति देने संबंधी नीति को स्वीकृति प्रदान की है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए बोर्ड के प्रवक्ता ने बताया कि अब परीक्षार्थी परिणाम की घोषणा के 60 दिन के अंदर 500 रुपये शुल्क के साथ उत्तर पुस्तिका की फोटोप्रति लेने के लिए प्रमाण पत्र दे सकता हैं। इसके उपरांत, यदि उत्तरपुस्तिकाओं की बिक्री नहीं की गई हो या ढ़ेर के रूप में इकट्ठी नहीं की गई हो तो सचिव को विशेष अधिकार होगा और वह उत्तरपुस्तिका देने के आदेश दे सकता है।
उन्होंने बताया कि प्रार्थना-पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर परीक्षार्थी को उत्तरपुस्तिका की प्रति उपलब्ध करवा दी जायेगी। यदि उत्तरपुस्तिका पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया में है तो परीक्षार्थी, जिसने पुनर्मूल्याकन करवाया है तथा इसके पश्चात अपने अंकों से संतुष्ट नहीं है तो वह भी अपनी उत्तरपुस्तिका की फोटोप्रति लेने के लिए पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया की समाप्ति के 15 दिनों के अंदर निर्धारित शुल्क सहित आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तरपुस्तिकाओं या पुनर्मूल्यांकन उत्तरपुस्तिकाओं की फोटोप्रति प्राप्त करने के उपरांत यदि अंकों की गणना में कोई त्रुटि पाई जाती है या कोई प्रश्न अंकन से छूट गया है तो परीक्षार्थी को उत्तरपुस्तिकाओं की प्राप्ति के 15 दिनों के अंदर बताना होगा। ऐसी उत्तरपुस्तिकाओं में संशोधन के लिए गोपनीय /पुनर्मूल्यांकन शाखा द्वारा परीक्षार्थी से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जायेगा।
उन्होंने बताया कि उत्तरपुस्तिका की प्राप्ति के लिए परीक्षार्थी को शपथ-पत्र देना होगा कि वह अंकन के स्तर को किसी भी स्थिति में चुनौती नहीं देगा और न ही उत्तरपुस्तिका का दुरूपयोग करेगा। परीक्षार्थी उत्तरपुस्तिका का स्वयं संरक्षक होगा और इसके लिए भागीदारी नहीं करेगा। ऐसा करने पर अनुचित साधन मामले (यूएमसी) के नियमों के तहत कार्रवाई की जायेगी।
प्रवक्ता ने बताया कि परीक्षार्थियों की मांग पर उत्तरपुस्तिकाओं की फोटोप्रति देने संबंधी नीति निर्धारण का निर्णय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के दृष्टिगत बोर्ड द्वारा गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। समिति द्वारा गुजरात शिक्षा बोर्ड, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक तथा कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र तथा केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, नई दिल्ली में लागू नियमों एवं विनियमों का अवलोकन करने के उपरांत अपनी सिफारिशें दी गई थी।