शिमलाः मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार एवं भारतीय सेना के अधिकारियों की एक संयुक्त समिति का गठन किया जाएगा, जो दोनों के मध्य लंबित मामलों पर हुई प्रगति का मासिक आधार पर अनुश्रवण करेगी। मुख्यमंत्री आज यहां नागरिक सैन्य सम्पर्क सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे। यह सम्मेलन हिमाचल प्रदेश सरकार तथा भारतीय सेना की पश्चिमी कमान के मध्य आयोजित किया गया।
श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि सेना, नागरिक प्रशासन, अर्धसैनिक बल और पुलिस लोकतंत्र के महत्वपूर्ण अंग हैं तथा राज्य की प्रगति एवं सतत् विकास एवं देश की बाह्य तथा आंतरिक सुरक्षा के लिए इनका आपसी तालमेल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश भूकंप संवेदी जोन पांच में आता है और इसके दृष्टिगत बेहतर आपदा प्रबंधन के लिए नागरिक एवं सैन्य अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल जरूरी है। उन्होंने कहा कि बाढ़ एवं बादल फटने जैसी घटनाओं से सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति के साथ-साथ सडक़ तथा पुलों जैसी अधोसंरचना को भी भारी क्षति होती है। सेना प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रदेश सरकार को समय पर सहायता उपलब्ध करवाती रही है और बचाव कार्यों तथा पुनर्वास प्रक्रिया में सेना की भूमिका सराहनीय रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सेना की सहायता के लिए हर संभव कदम उठाएगी और सेना तथा सरकार के मध्य संबंधों को और मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर राज्य में आतंकवाद तथा सुरक्षा व्यवस्था नियंत्रण में है, किन्तु सुरक्षा के दृष्टिगत यह आवश्यक है कि हिमाचल प्रदेश की सीमा पर निरंतर चौकसी रखी जाए, क्योंकि प्रदेश की सीमाएं एक ओर चीन तथा दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर से सटी हैं।
श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि देश के सशस्त्र बलों में हिमाचल प्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्तमान में राज्य से संबंधित 1,20,600 सैनिक सशस्त्र बलों में कार्यरत हैं, प्रदेश में 1,04,896 भ्पूर्व सैनिक, 1074 युद्घ विधवाएं तथा 28,667 अन्य सैनिक विधवाएं हैं। प्रदेश सरकार कार्यरत एवं सेवानिवृत सैनिकों एवं उनके परिवारों के कल्याण के लिए वचनबद्घ है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल (सेवानिवृत) डॉ. धनीराम शांडिल ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि वे स्वयं सेना में रहे हैं और सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा उनके परिवारों की समस्याओं से भलीभांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में सेवा का हिमाचल प्रदेश का समृद्घ इतिहास है और प्रदेश को अपने सभी सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों पर गर्व है,
जिन्होंने विभिन्न युद्घों में अदम्य साहस का परिचय देते हुए न केवल विभिन्न शौर्य पुरस्कार हासिल किए बल्कि देश और प्रदेश का नाम भी रौशन किया।
पश्चिमी कमान के जीओसी-ईन-सी लै. जनरल संजीव चाचरा ने सशस्त्र सेनाओं की आवश्यकताओं पर ध्यान देने के लिए राज्य सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश से बड़ी संख्या में अधिकारी एवं सैनिक सशस्त्र बलों में कार्यरत हैं, जिन्होंने बाहरी एवं आंतरिक खतरों से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वे आपसी मामलों विशेषकर भूमि से संबंधित मामलों का शीघ्र निपटारा करेें।
उन्होंने अनाडेल मामले में त्वरित कार्रवाई करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए मांग की कि अनाडेल मैदान को सेना को लंबी अवधि के लिए पट्टे पर दिया जाए। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सेना राज्य सरकार को हर संभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि पूर्व सैनिकों को बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए जाएं ताकि उनका जीवन स्तर और अच्छा बन सके।
उन्होंने मांग की कि ऊना में सेना को भूमि आवंटित की जाए ताकि यहां आदर्श सेना स्टेशन स्थापित किया जा सके। उन्होंने आशा जताई कि राज्य सरकार द्वारा अन्य लंबित मसले भी प्राथमिकता के आधार पर निपटाए जाएंगे।